ज्ञान प्राप्त करना सरल है, लेकिन ज्ञान के साथ विनय होना बहुत कठिन है-मुनिश्री

Sep 27 2022

ग्वालियर। दुनिया में पहचान अहंकार से नहीं संस्कार से बनती है जिसके जीवन में संस्कार होते हैं वह दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बना लिया करते हैं। विनयवान व्यक्ति जीवन में बहुत उन्नति प्राप्त करता है। ज्ञान प्राप्त करना सरल है, लेकिन ज्ञान के साथ-साथ विनय होना बहुत कठिन है। ज्ञान अंगूठी है और विनय उसमें चढ़ा हुआ नग है। अदब सीखना है तो कलम से सीखो, जब भी चलती है तो सर झुका कर के चलती है। यह बात श्रमण मुनिश्री विनय सागर महाराज ने मंगलवार को नई सड़क स्थित प्रेमचंद्र संजय पंडवीय के निवास पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
मुनिश्री ने कहा कि जिसके जीवन में नम्रता, कोमलता एवं गुणग्रहण की दृष्टि हुआ करती है वह अपने जीवन में बहुत आगे उन्नति कर लेता है। विनय के साथ विद्या प्राप्त होती है, धन प्राप्त होता है। वहीं जो व्यक्ति अहंकारी होता है वह भोजन में कंकड़ के समान होता है और जो व्यक्ति विनयवान होता है वह जीरा के समान होता है। कंकड़ से कुरकुरा भी किरकिरा हो जाता है और जीरा डालने से उसमें स्वाद और जायका बढ़ जाता है। इसलिए अपने जीवन में अहंकार को स्थान ना देते हुए विनय गुण ही स्थान दें, क्योंकि विनय के माध्यम से लोग आकर्षित होते हैं। जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि मुनि श्री विनय सागर जी महाराज का दाना ओली के गुड़ा गुड़ी का नाका जैन मंदिर के लिए मंगल विहार हुआ। मुनिश्री के मंगल प्रवचन  9 बजे से जैन मंदिर गुडग़ुड़ी का नाका पर होंगे।
मुनिश्री की दूसरे दिन भी भक्तों ने  कराई आहराचार्य, भजन गायक आरती उतारी
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि नई सड़क पर मुनिश्री विनय सागर महाराज की आहराचार्य श्री प्रेमचंद्र संजय कुमार किरण जैन के निवास पर मुनिश्री की नवधा भक्ति के साथ आहारचर्या कराई। आहारचर्या के उपरांत भक्तों ने गुरु मेरे सर पर रखा दो दोनों हाथ..गुरु मेंरी मेरी नैया उस पार लगा देना.. गुरु के दरबार में भक्तों को मिलता है आशीष.. जैसे भजनों की प्रस्तुति के साथ दीपों के मंगल आरती उतारकर मंगल आशीर्वाद लिया।
धनवान वही है जिनके घर में अतिथि का सत्कार है
मुनिश्री ने कहा कि धनवान वही है जिनके घर में अतिथि का सत्कार है। जिनके घरों में साधु संतों का आहार है। रोटियां तो सबके घर में है लेकिन साधु-संतों का आहार जहां है वह ही धनवान है। जहां रोटियां बेटियां बनाती है और बेटे साधु के हाथ में रखते हैं ऐसा भारत देश हमारा है। यहां पहली रोटी गाय की बनती है। विश्व में किसी भी देश में चले जाना लेकिन जब मृत्यु का समय आए तो भारत लौट आना। भारत भूमि साधु संतों की भूमि है। यहां अंतिम समय में भी साधु संतों के दर्शन होंगे। शास्त्रों की वाणी,जिनवाणी सुनने को मिलती है।