भक्तों ने की मां ब्रह्मचारिणी की आराधना पैदल पहुंचे मंदिर, किए दर्शन

Sep 27 2022

ग्वालियर। नवरात्र के दूसरे दिन भक्तों ने मां ब्रह्मचारिणी की आराधना की। ब्रह्मचारिणी मां दुर्गा का एक अवतार हैं। शास्त्रों में लिखा है कि ब्रह्मचारिणी का अर्थ है तपस्या करने वाली देवी। उनके दाहिने हाथ में नामजप की माला है और उनके बाएं हाथ में कमंडल है। तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार और संयम की वृद्धि के लिए भक्तों ने माता की आराधना की। नवरात्र के दूसरे दिन बड़ी संख्या में भक्तों ने मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की। 
नवरात्र महोत्सव के मंगलवार दूसरे दिन शीतला माता मंदिर पर भक्तों की अपार भीड़ रात से ही लगी। शीतला माता जाने वाले भक्त रातभर पैदल चलते हुए तड़के मंदिर में पहुंचे और आरती में शामिल हुए। मंदिर में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए भारी तादात में पुलिस बल लगा हुआ है। नवरात्र के दूसरे दिन मंगलवार तड़के से ही पैदल जाने वालों की भीड़ नजर आ रही थी तो वहीं शीतला माता जाने के लिए टोलियों के रूप में भक्त माता के जयकारे लगाते हुए जा रहे थे। आलम यह है कि शीतला माता मंदिर पर भोर होते ही भक्तों की लम्बी कतारें दर्शन करने के लिए लगी हुई हैं और पूजा अर्चना करते हुए महामाई से खुशहाली की कामना कर रहे हैं। 
शीतला माता मंदिर पर दुकानों के आसपास भी खरीदारी करने के लिए लोग पहुंच रहे हैं। माता का शृंगार खरीदकर अर्पित कर रहे हैं तो हरी चूडिय़ां महिलाएं पहन रही हैं। सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही न हो इसको देखते हुए पुलिस अफसर भी निगाह बनाए हुए हैं।
शहर के प्रमुख माता मंदिरों में भेलसे वाली माता मंदिर, बहोड़ापुर, मांढरे की माता, नई सड़क स्थित पहाड़ी वाली माता मंदिर, झांसी रोड पर वैष्णोंदेवी मंदिर, मंशापूर्ण माता मंदिर, आमखो स्थित महाकाली मंदिर, नाका चंद्रवदनी स्थित माता पर पूजा के लिए भक्तों की भीड़ लगी रही। 
मंदिरों में लगा मेला
जिला कोर्ट के खूबी की बजरिया में स्थित हाइकोर्ट वाले काली माता मंदिर व आमखो पर स्थित माता के मंदिर, सातऊ के शीतला मंदिर पर सुबह से देवी भक्तों के दर्शनों के लिए आने का सिलसिला शुरू हो गया लोगों ने श्रद्धाभाव के साथ आदिशक्ति मां की पूजा-अर्चना की और घर-परिवार की सुख-समृद्धि और शांति की कामना की। मांढरे की माता के नीचे झूले व खिलौनों की दुकानें भी सज गईं है। नौ दिन तक नगर में उल्लास व उत्सव जैसा माहौल रहेगा।
आज मां चन्द्रघंटा की होगी पूजा
नवरात्र के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजाकी जाएगी। Óयोतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया कि माता चंद्रघंटा को राक्षसों का वध करने वाला कहा जाता है। ऐसा माना जाता है मां ने अपने भक्तों के दुखों को दूर करने के लिए हाथों में त्रिशूल, तलवार और गदा रखा हुआ है। माता चंद्रघंटा के मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र बना हुआ है, जिस वजह से भक्त मां को चंद्रघंटा कहते हैं। इनके दस हाथ हैं। इनके दसों हाथों में खड्ग आदि शस्त्र तथा बाण आदि अस्त्र विभूषित हैं। इनका वाहन सिंह है। इनकी मुद्रा युद्ध के लिए उद्यत रहने की होती है। माता को दूध या दूध से बनी चीजों का भोग लगाया जाता है।