9 साल की कड़ी मेहनत पर हाथ आया अपहरण और हत्या का आरोपी भागा

Sep 25 2022

ग्वालियर।बीकॉम के छात्र प्रांकुल का अपहरण और हत्या करने वाले शातिर बदमाश को क्राइम ब्रांच ने दिल्ली-गाजियाबाद बॉर्डर से गत रोज गिरफ्तार किया था। 9 साल बाद 20 दिन की कड़ी मेहनत के बाद वह पुलिस के हाथ आया था, लेकिन पुलिस की तीन गलतियों का फायदा उठाकर वह फरार हो गया। 24 घंटे भी पुलिस उसे हवालात में नहीं रख सकी। पुलिस को सिर्फ स्कूल से उसकी अंकसूची निकलवानी थी।
इस पर किसी सिपाही को भेज सकते थे। उसे वहां ले जाने की जरूरत क्या थी। यही बात पुलिस अफसरों को हजम नहीं हो रही है। इसी बात पर एसएसपी ने उसे स्कूल ले जाने वाले तीन पुलिस कर्मियों को सस्पेंड कर दिया है।
मार्कशीट निकालने आरोपी को ले जाने की क्या जरूरत थी
9 साल बाद अपहरण, हत्या के आरोपी को जयपाल उर्फ मुकेश परिहार को पुलिस ने गाजियाबाद-दिल्ली बॉर्डर से गिरफ्तार किया था। घटना के समय वह 16 साल का था अब उसकी उम्र 25 थी। अब उसकी उम्र की सच्चाई पता करने पुलिस घासमंडी उसके स्कूल श्रीकृष्ण मेमोरियल शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पहुंची। एक एसआई मोहन सिंह व हवलदार रवि पाठक उसे लेकर पहुंचे। अब एक बार समझ नहीं आ रही है कि मार्कशीट निकालनी थी तो यह काम कोई सिपाही भी कर सकता था। आरोपी को साथ लेकर जाने की क्या जरूरत थी। न तो कुछ बरामद करना था न ही कोई स्पॉट था। यह बात अफसर भी नहीं समझ पा रहे हैं।
पुलिस बिना हथकड़ी लगाए बदमाश को क्यों ले गई
आमतोर पर देखा जाता है कि गंभीर अपराध के आरोपियों को पुलिस बिना हथकड़ी लगाए कहीं भी नहीं ले जाती है। पर इस मामले में अपहरण और हत्या जैसे ऐसे आरोपी जिसे पकडऩे में 9 साल लग गए उसे पुलिस रस्सी से बांधकर ले गई। जिसका उसने फायदा उठाया और भाग गया। हथकड़ी लगी होती तो वह पुलिस जवान से भाग ही नहीं सकता था।
तीन की जगह दो पुलिसकर्मी गए, वो भी उम्रदराज
सबसे बड़ी गलती यह रही कि थाने से आरोपी को उसके स्कूल ले जाने के लिए 3 पुलिस कर्मियों की रोचनामचे में रवानगी डाली गई है। जिसमें सब इंस्पेक्टर मोहन सिंह (55), हवलदार रवि पाठक (50) व एक अन्य हवलदार रघुवीर उसे लेकर गए थे, लेकिन रघुवीर गया ही नहीं। ये अपने आप में बड़ी चूक है। इसके साथ ही जो दो पुलिसकर्मी गए थे वह उम्रदराज थे, जबकि आरोपी की उम्र सिर्फ 25 साल थी। उसने दौड़ लगाई तो 50 साल का हवलदार उसके पीछे दौड़ा, लेकिन पीछा नहीं कर पाया। यहां भी पुलिस ने चूक की। तेज तर्रार युवा जवान क्यों नहीं भेजे गए। तीसरा पुलिसकर्मी होता तो शायद वह निगरानी रख सकता था।
यह है पूरा मामला
शहर के बहोड़ापुर इलाके में रहने वाले एक छात्र प्रांकुल शर्मा के अपहरण और हत्या में 9 साल से फरार आरोपी जयपाल उर्फ मुकेश परिहार की लोकेशन पुलिस को दिल्ली में मिली थी। जिस पर पुलिस किसी तरह उसके ठिकाने पर पहुंची और उसे गत रोज दिल्ली से दबोच लिया। इस मामले में कुल 9 आरोपी थे। जिनमें आठ आरोपी पूर्व में गिरफ्तार होकर जेल जा चुके हैं, लेकिन यह अपने आप को मृत घोषित कर रखा था। यहां बता दें कि बहोडापुर इलाके में रहने वाले प्रंकुल शर्मा का जयपाल उर्फ मुकेश परिहार और उसके साथियों ने साल 2013 में अपहरण कर लिया था। बाद में डबरा के पास सिंध नदी में ले जाकर उसकी हत्या कर दी थी। हत्या करने के बाद भी आरोपी उसके परिवार से फिरौती की मांग करते रहे थे। बाद में इस बच्चे की लाश शिवपुरी में बरामद की गई थी। आरोपी के माता-पिता भी इस वारदात में शामिल रहे थे। 
पुलिस ने उसे दिल्ली से गिरफ्तार किया था। यहां पुलिस को पत लगा था कि वह नए नाम और पहचान से वहां रह रहा था। उसने नई पहचान के दस्तावेज भी बनवा लिए थे। पर अब इस मामले में नया मोड़ आ गया है। आरोपी पुलिस कस्टड़ी से फरार हो गया है।
ऐसे भागा आरोपी
जब जयपाल उर्फ मुकेश वारदात में शामिल हुआ था तो वह 16 साल का था। उसके नाबालिग होने के कारण पुलिस गलफत में थी। 9 साल बाद अब वह 25 का हो गया है। उसकी उम्र को लेकर ही छानबीन करने बहोड़ापुर पुलिस की टीम एसआई मोहनसिंह, हवलदार रवि पाठक उसे लेकर घासमंडी स्थित उसके स्कूल श्रीकृष्ण मेमोरियल शासकीय स्कूल पहुंचे थे। यहां वह उसकी अंकसूची को लेकर बात कर रहे थे। उसका एक हाथ रस्सी से बांधकर हवलदार पकड़े हुए था। इसी समय वह चकमा देकर भाग गया। अब पुलिस उसी दिशा में तलाश कर रही ही।
इस बारे में एसएसपी अमित सांघी ने कहा कि यह बहुत ही गंभीर लापरवाही है। इसमें दोषी पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। थाना प्रभारी इसके लिए पूरी तरह जिम्मेदार हैं, इसलिए कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया है। थाना प्रभारी पर भी कार्रवाई की जाएगी। इस पूरे प्रकरण की जांच कराई जा रही है।