दाता बंदी छोड़ दिवस: अमृतसर से शबद चौकी आई

Sep 20 2022

ग्वालियर। ग्वालियर दुर्ग पर स्थित गुरुद्वारा दाताबंदी छोड़ पर तीन दिवसीय दाता बंदी छोड़ दिवस पर अमृतसर स्वर्ण मंदिर से आई संगत ने मंगलवार तड़के जलालपुर तिराहे से नगर में प्रवेश किया। जहा स्थानीय सिख समाज के लोगों ने शबद चौकी की पुष्प वर्षा की। हजीरा गुरुद्वारे पर शबद चौकी का अभिवादन किया गया। इस वर्ष भी दाता बंदी छोड़ दिवस सिख संगत द्वारा बड़े ही हर्ष-उल्लास के साथ 23 सितंबर से मनाया जायेगा। 
पर्व के तीनों दिन कीर्तन होगा और दीवान सजेगा। गुरु का अटूट लंगर निरंतर चल रहा है। प्रकाश पर्व में भाग लेने के लिये देश-विदेश से संगतें आने का सिलसिला शुरू हो गया है। इस दौरान दाता बंदी छोड़ दिवस पर दाता बंदी छोड़ गुरुद्वारे पर आकर्षक विधुत सज्जा की गई है। इसके साथ ही गुरु का अटूट लंगर भी चल रहा हैं। वर्तमान में गुरुद्वारा प्रमुख बाबा लक्खा सिंह व गुरुद्वार प्रबंधक बाबा सेवा सिंह हैं।
22,23 व 24 सितंबर की गुरुद्वारा दाता बंदी छोड़ पर दीवान सजेगा और कीर्तन होंगे। समापन सर्व पितृ अमावस्या को होगा। संगतों के ठहरने की व्यवस्था नगर के प्रमुख गुरुद्वारे में की गई हैं। अमृतसर स्वर्ण मंदिर से संगत मंगलवार को यहां आई। 
इसलियए मनाया जाता है दाता बंदी दिवस
मुगल बादशाह जहांगीर ने ग्वालियर किले में छठवें गुरु हरगोविंद साहब को किले में कैद रखा था। बादशाह ने परेशान होकर गुरु हरगोविंद सिंह को रिहा करने का फैसला किया। गुरु हरगोविंद सिंह के साथ 52 हिंदू राजा भी कैद थे। गुरु हरगोविंद सिंह ने बादशाह के सामने अपने साथ 52 हिंदू राजाओं को रिहा करने की शर्त रखी। बादशाह जहांगीर उनकी शर्त को मानते हुए सर्व पितृ अमावस्या के दिन गुरु हरगोविंद सिंह के साथ 52 राजाओं को रिहा किया था। जिस स्थान पर छठवें गुरु हरगोविंद सिंह को कैद रखा गया था। उसी स्थान पर गुरुद्वारा दाता बंदी छोड़ का निर्माण किया गया।