मप्र में तबाह हो रहे हैं किसान, बर्बाद हो रही है खेती देशव्यापी आंदोलन के नए चरणों की घोषणा

Sep 18 2022

ग्वालियर। सरकार की सारी कागजी घोषणाओं, खोखले दावों के बावजूद मध्यप्रदेश में खेती बर्बाद हो रही है। किसान तबाह हो रहे हैं। पिछले महीने से लगातार लहसुन के नदियों में बहाये जाने की खबरें आ रही हैं क्योंकि उनकी कीमत 40 पैसा प्रति किलो तक पहुँच गयी है। सरसों से लेकर धान तक के यही हाल है। सरकार की अकर्मण्यता और कालाबाजारियों के साथ उसके रिश्तों के चलते खाद और कीटनाशक किसानों की पहुँच से बाहर हो रहे हैं। मध्यप्रदेश नकली बीज और खाद का सबसे बड़ा अड्डा बन गया है। पशु व्यापार पर रोक के चलते आवारा जानवर एक वास्तविक राष्ट्रीय आपदा बनते जा रहे हैं। 
दूध और उसके उत्पादों की कीमत पहले से ही लागत से कम थी अब रही सही कमर टैस-खोर सरकार ने दूध, दही,पनीर, छाछ, लस्सी, खोये पर जीएसटी लगाकर तोड़ दी है। बजाय इन हालात को बदलने के सरकार खेती की जमीन का कपनीकरण करके जमीने छीन रही है। इस तरह विस्थापित और बेदखल किये जा रहे किसान कहाँ जाएंगे जब कि खुद उनके जवान बेटे और बेटियों के लिए ही रोजगार के सारे दरवाजे बंद कर दिए गए हैं। 
संयुक्त किसान मोर्चे से किये गए लिखित वायदे से केंद्र सरकार मुकर गयी है। एमएसपी के लिए क़ानून बनाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया। 700 शहीदों के बारे में कुछ नही किया। लखीमपुर खीरी में 4 किसानो और एक पत्रकार को जीप से कुचलकर मार डालने वाले गृह राज्य मंत्री के बेटे को बचाया जा रहा है, टेनी मिश्रा से इस्तीफा नहीं लिया गया। लिखित वायदे के विरुद्ध जाकर बिजली क़ानून ले आया गया है। इसलिए संयुक्त किसान मोर्चे ने एक बार फिर अपने आंदोलन को छेडऩे का कार्यक्रम घोषित कर दिया है। अब किसानों के कर्जा माफी, कृषि बीमा और किसान पेन्शन की मांग एसकेएम के डिमांड चार्टर में जोडऩे का फैसला लिया गया है और आंदोलन के अगले कार्यक्रम की घोषणा कर दी गयी है। 
इसमें 15- 25 सितंबर के बीच तहसील स्तर पर देश भर में सांसदों-विधायकों को मांगपत्र सौपना, राज्य स्तरीय एसकेएम बैठक करना, 3 अक्टूबर को लखीमपुर के चार किसानों और एक पत्रकार की शहादत को एक साल पूरा होने पर दिन देश भर में शहीद किसानों और पत्रकारों को श्रद्धांजलि देना, साथ ही हत्या के साजिशकर्ता केन्द्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र टैनी के अब तक मंत्री पद पर बनाए रखने, बेगुनाह किसानों को जेल में बंद रखने और घटना में पीडि़त परिवार को आर्थिक मदद और नौकरी देने के वायदे से मुकर जाने के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन करना, केन्द्र सरकार की अर्थी निकालने, पुतला फूंकनें जैसी तमाम गतिविधियों के जरिए आक्रोश व्यक्त करना शामिल है।