प्रधानमंत्री मोदी ने बर्थडे पर 3 चीतों को कूनो में छोड़ा, नए घर में सहमते हुए रखे कदम

Sep 17 2022

ग्वालियर। भारत का 70 साल का इंतजार17 सितम्बर शनिवार को खत्म हो गया। नामीबिया से आए 8 चीतों ने देश की सरजमीं पर पहला कदम रखा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कूनो नेशनल पार्क में बॉक्स खोलकर 3 चीतों को क्वारंटीन बाड़े में छोड़ा। प्रधानमंत्री मोदी ने चीते भेजने के लिए नामीबिया का आभार माना।
कूनो में चीता फिर से दौड़ेगा तो यहां बायोडायवर्सिटी बढ़ेगी। यहां विकास की संभावनाएं जन्म लेंगी। रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। प्रधानमंत्री ने लोगों से अपील की कि अभी धैर्य रखें, चीतों को देखने नहीं आएं। ये चीते मेहमान बनकर आए हैं। इस क्षेत्र से अनजान हैं। कूनो को ये अपना घर बना पाएं, इसके लिए इनको सहयोग देना है।
कूनो में प्रधानमंत्री के लिए 10 फीट ऊंचा प्लेटफॉर्मनुमा मंच बनाया गया था। इसी मंच के नीचे पिंजरे में चीते थे। प्रधानमंत्री ने लीवर के जरिए बॉक्स को खोला। चीते बाहर आते ही अनजान जगह में सहमे हुए दिखे। सहमते कदमों के साथ इधर-उधर नजरें घुमाईं और चहलकदमी करने लगे। लंबे सफर की थकान चीतों पर साफ दिख रही थी। चीतों के बाहर आते ही प्रधानमंत्री मोदी ने ताली बजाकर उनका स्वागत किया। मोदी ने कुछ फोटो भी क्लिक किए। 500 मीटर चलकर मोदी मंच पर पहुंचे थे। उनके साथ राज्यपाल मंगूभाई पटेल और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी थे। शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन भी था।
बॉक्स से बाहर निकले चीते कूनो से अनजान थें। वे कुछ सहमे हुए नजर आए। पहले इधर-उधर देखा और चहलकदमी करने लगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्वारंटीन बाड़े में घूम रहे चीतों के कुछ फोटो भी क्लिक किए। आज पीएम का जन्मदिन भी है।
प्रधानमंत्री मोदी ने भाषण अपने भाषण में कहा कि हमने उस समय को भी देखा, जब प्रकृति के दोहन को शक्ति प्रदर्शन का प्रतीक मान लिया गया था। 1947 में जब देश में केवल 3 चीते बचे थे, तो उनका भी शिकार कर लिया गया। ये दुर्भाग्य रहा कि 1952 में हमने चीतों को विलुप्त तो घोषित कर दिया, लेकिन उनके पुनर्वास के लिए दशकों तक सार्थक प्रयास नहीं किए। आज आजादी के अमृत काल में देश नई ऊर्जा के साथ चीतों के पुनर्वास के लिए जुट गया है।
यह एक ऐसा काम है, राजनीतिक दृष्टि से जिसे कोई महत्व नहीं देता, इसके पीछे हमने वर्षों ऊर्जा लगाई। चीता एक्शन प्लान बनाया। हमारे वैज्ञानिकों ने नामीबिया के एक्सपर्ट के साथ काम किया। पूरे देश में वैज्ञानिक सर्वे के बाद नेशनल कूनो पार्क को शुभ शुरुआत के लिए चुना गया। प्रकृति और पर्यावरण, पशु और पक्षी भारत के लिए सस्टेनेबिलिटी और सिक्योरिटी के विषय नहीं हैं। हमारे लिए ये सेंसिबिलिटी और स्प्रिचुअलिटी का भी आधार हैं।
मुख्यमंत्री शिवराज बोले- इससे बड़ा तोहफा नहीं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कूनो जाने से पहले विशेष विमान से दिल्ली से ग्वालियर पहुंचे। यहां मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा और राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने उन्हें रिसीव किया। मुख्यमंत्री ने कहा, मप्र के लिए इससे बड़ा कोई तोहफा नहीं। देश में चीते विलुप्त हो गए थे और इन्हें फिर से बसाना एक ऐतिहासिक कदम है। यह इस सदी की सबसे बड़ी वन्यजीव घटना है। इससे मध्यप्रदेश में पर्यटन को तेजी से बढ़ावा मिलेगा।
केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने श्योपुर आने पर प्रधानमंत्री मोदी का आभार मानते हुए कहा- ये श्योपुर जिला बहुत ही छोटा है। लेकिन, प्राकृतिक संपदा से भरा है। इस जिले में दो विधानसभा हैं। इस क्षेत्र में जंगल हैं। शिव भगवान के कई मंदिर हैं, इसी कारण इसे श्योपुर नाम दिया गया है। आज गांव के गरीब किसानों से मिलने के लिए, हमारी बहनों का उत्साह बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आए हैं।
श्योपुर में अभयारण्य बनाने के लिए लोग विस्थापित हो गए, इंतजार करते रहे कि क्षेत्र आगे बढ़ेगा। लेकिन, ये इंतजार ही रहा। 2014 में पीएम मोदी ने पद संभाला। इसके बाद उनसे अनुरोध किया। पीएम मोदी ने कहा- हम श्योपुर चलेंगे तो खाली हाथ नहीं चलेंगे। जब पहुंचेंगे तो चीते के साथ ही इस अभयारण्य का शुभारंभ करेंगे।