नामीबिया से विशेष विमान से ग्वालियर एयरबेस पर उतरे चीते

Sep 17 2022

ग्वालियर। नामीबिया से स्पेशल चार्टर्ड कार्गो फ्लाइट 8 चीतों को लेकर शनिवार सुबह 7.55 बजे ग्वालियर एयरबेस पहुंची। उनके साथ 24 लोगों की टीम भी आई है। यहां उनका रुटीन चेकअप किया गया। चीतों के साथ नामीबिया के वेटरनरी डॉक्टर एना बस्टो भी आए हैं। नामीबिया से चीतों को खास तरह के पिंजरों में लाया गया। लकड़ी के बने इन पिंजरों में हवा के लिए कई गोलाकार छेद किए गए हैं। ग्वालियर एयरबेस से चिनूक हेलिकॉप्टर के जरिए चीतों को कूनो नेशनल पार्क ले जाया गया।
गत शुक्रवार रात चीतों को लेकर टेराएविया की स्पेशल फ्लाइट क्रमांक टीवीआर 4724 ने नामीबिया से ग्वालियर के लिए उड़ान भरी जो जिम्बाबे, तंजानिया, सोमालिया, केन्या की वायुसीमा से उड़ते हुए विमान अरब सागर के ऊपर करीब चार घंटे रहा। गुजरात की ओर से देश में प्रवेश करते हुए ग्वालियर के एयरबेस पर सुबह सात बजे लैंड किया। फ्लाइट में चीतों को पूरी सतर्कता के साथ कैज में रखा गया था। विमान के ग्वालियर में उतरा जहां कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह और एसएसपी अमित सांघी मौजूद रहें। इसके बाद चीतों को श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क ले जाया गया, इसके पूर्व ग्वालियर एयरपोर्ट पर उनका चेकअप भी हुआ।
चीतों को लेकर विशेष विमान शनिवार सुबह 7.55 बजे एयरपोर्ट पर पहुंचा। यहां चीतों के पिंजरों को बाहर निकालकर विशेषज्ञ रूटीन चेकअप किया किया। चेकअप होने पर हेलिकाप्टर चीतों को लेकर कूनो नेशनल पार्क के लिए रवाना हुआ। पहले नामीबिया से चीते लेकर आने वाले विशेष विमान जयपुर एयरपोर्ट पर आने वाले था, लेकिन गुरुवार को अचानक प्लान में बदलाव किया गया है।
नामीबिया से चीतों को भारत लाने वाले विशेष विमान पर टाइगर की खूबसूरत पेंटिंग की गई। विमान कंपनी ने इस फ्लाइट को विशेष फ्लैग नंबर 118 दिया। कंपनी दुनिया में पहली बार चीतों को शिफ्ट करने के लिए फ्लाइट का संचालन कर रही है, ऐसे में यह उनके लिए एक ऐतिहासिक पल है। नामीबिया में भारतीय दूतावास ने इस विमान की तस्वीर ट्वीट की है। 
8 चीतों में 2 सगे भाई भी
दक्षिण अफ्रीका के प्रिटोरिया विश्वविद्यालय में प्रो. एड्रियन ट्रोडिफ ने बताया कि भारत आए 8 चीतों में दो सगे भाई हैं। इनकी उम्र ढाई से साढ़े पांच साल के बीच है। चीते की औसत उम्र 12 साल होती है।
बड़े मांसाहारी वन्यप्राणी की शिफ्टिंग की यह दुनिया की पहली परियोजना है। जिन चीतों को पार्क के क्वारंटीन बाड़े में छोड़ा जाएगा, उन्हें लाने के लिए भारत और नामीबिया सरकार के बीच 20 जुलाई 2022 को एग्रीमेंट हुआ था।
देश में 500 चीते होंगे, तब मानेंगे री-अरेंजमेंट
एक्सपर्ट्स के अनुसार, भारत में चीतों का पुनर्व्यवस्थापन (री-अरेंजमेंट) तब माना जाएगा, जब यहां चीतों की संख्या 500 हो जाएगी। इस टारगेट को पूरा करने के लिए साउथ अफ्रीका और नामीबिया से हर साल 8 से 12 चीते भारत भेजे जाएंगे। इसके अलावा भारत में चीतों की वंश वृद्धि भी इसमें शामिल होगी। इस दौरान अंतरराष्ट्रीय स्तर के मानकों के आधार पर चीतों के रहन-सहन समेत अन्य मानकों का पूरा खाका बन गया है।
चीतों के स्वभाव के अध्ययन के बाद ही नामकरण किया जाएगा
चीतों का नामकरण उनके स्वभाव का अध्ययन करने के बाद किया जाएगा। हर एक वन्य प्राणी का अपना स्वभाव होता है। कोई इंसानों को पसंद करता है, तो कई आक्रामक होता है। पार्क के ष्ठस्नह्र प्रकाश कुमार वर्मा का कहना है कि चीतों के लिए उनके केयर टेकर भी नियुक्त किए जाएंगे। सभी केयरटेकर के अनुभव को रिकॉर्ड में लिया जाएगा। इसके बाद नामकरण किया जाएगा। इसमें तीन से पांच महीने तक का वक्त लग सकता है।
कूनो पालपुर की जमीन पर 19 को कोर्ट में सुनवाई
कूनो नेशनल पार्क की जमीन को लेकर विवाद शुरू हो गया है। जमीन देने वाले पालपुर राजघराने के वंशजों ने कोर्ट में अवमानना याचिका लगाई है। याचिका में कहा है कि हाईकोर्ट ने हमारी याचिका और दावों के जवाब में अपना जवाब देने के लिए जिला प्रशासन को कहा था। कलेक्टर ने हाईकोर्ट के सीधे आदेश के बावजूद हमारी याचिका का हवाला दिए बिना रिपोर्ट पेश कर भूमि अधिग्रहण करने का आदेश जारी कर दिया।
पालपुर राजघराने के वंशज ने पिछले दिनों एक वीडियो जारी कर कहा, या तो हमें अपनी जमीन वापस दी जाए या सेंचुरी (अभयारण्य) में शेर लाए जाएं। उन्होंने अपना किला और जमीन शेरों के लिए दी थी, न कि चीतों के लिए। जब कूनो को गिर शेरों को लाने के लिए अभयारण्य घोषित किया गया, तो उन्हें अपना किला और 260 बीघा भूमि खाली करनी पड़ी। बता दें, पालपुर राजघराने के वंशजों ने अपनी पुश्तैनी संपत्ति वापस पाने के लिए राज्य सरकार के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इस मामले में अगली सुनवाई 19 सितंबर को विजयपुर एडीजे कोर्ट में होगी।