छटनी की परमीशन लेकर काट दिया 5 दशक पुराना पेड़

Sep 15 2022

ग्वालियर। एक निर्ममता की पराकाष्ठा की तस्वीर सामने आई। जिसमें चेतकपुरी स्थित रामजानकी मंदिर में नगर निगम के उद्यान विभाग से छटनी की परमिशन लेकर 5 दशक पुराने हरा भरा आम का वृक्ष मंदिर कमेटी द्वारा कटबा दिया गया। जैसे ही यह जानकारी स्थानीय पर्यावरण प्रेमी शिवेंद्र सिंह सोलंकी व अन्य को प्राप्त हुई। उन्होंने मौके पर पहुंचकर पेड़ काटने की कार्रवाई बन्द करवाई। जिससे चार से पांच दशक पुराने 5 पेड़ कटने से बच गए। 
पर्यावरण प्रेमियों ने निगम कर्मचारियों को सूचना देकर रामजानकी मंदिर  पर पंचनामा बनबाया। जिसमें निगम कर्मचारियों ने हरा भरा आम का पेड़ काटने की पुष्टि की। और मध्यप्रदेश वृक्ष अधिनियम 2001 के अनुसार पेड़ की छटाई की परमिशन पर कटाई की कार्रवाई नियम विरुद्ध मानी। पूरे मामले को आगामी कार्यवाही हेतु प्रेषित किया। 
अब सवाल यह उठता है कि बार-बार पेड़ों को विकास के नाम पर काटने का दुस्साहस सरकार और जनता द्वारा क्यों किया जाता है? वह भी उस दौर में जब कोरोना काल में इन पेड़ों से मिलने वाली प्राणवायु का महत्व हम सब ने समझा। क्यों इन पर्यावरण अपराधियों के विरुद्ध सशक्त कार्यवाही नहीं होती? जिससे इस तरह का कुकत्य करने के बारे में लोग सोच ही नहीं पाए।
आपके कथन
हमारे द्वारा पेड़ नही काटा गया है। नगर निगम से हमने पेड़ की छटनी करने के लिए 100 रूपये की पर्ची कटवाई थी। नगर निगम के कर्मचारियों ने ही पेड़ काटा है।
नीलकमल महेश्वरी, रामजानकी मंदिर कमेटी अध्यक्ष  
जैसे ही हमें पेड़ काटने की सूचना मिली हम स्थानीय निवासियों ने पेड़ काटे जाने का विरोध किया है। निगम अधिकारियों को सूचना देकर पंचनामा बनवाया गया है। और मंदिर की कथाकथित कमेटी की प्राथमिकी भी स्थानीय पर्यावरण प्रेमियों द्वारा कराई जा रही है।
शिवेंद्र सिंह सोलंकी, पर्यावरण प्रेमी व स्थानीय निवासी
दशको पुराने वृक्षों को लगातार सरकारी विभाग व आम नागरिकों द्वारा निर्ममता से काटा जाता रहा है। विरोध करने पर कटाई जब रूकती है, तब एक-दो पेड़ काट दिए जाते हैं। अत: पेड़ों की कटाई किसी भी कीमत पर नहीं की जानी चाहिए। समस्या का स्थाई समाधान निकालना होगा। 
राज चड्डा, संयोजक दाना पानी फॉर बर्ड्स