प्र्रकरणों के निराकरण में बढ़ेगी मध्यस्थों की भूमिका-रोहित आर्या
Sep 10 2022
ग्वालियर। मध्यप्रदेश के प्रशासनिक न्यायमूर्ति रोहित आर्या ने कहा है कि न्यायालयों में लंबित प्रकरणों का निराकरण मध्यस्थता के जरिए करने के लिए पक्षकारों के मनोविज्ञान को समझना जरुरी है। आने वाले समय में प्रकरणों के निराकरण में मध्यस्थ की भूमिका बढऩे वाली है इसलिए मध्यस्थ को अपडेट करते रहना चाहिए। यह कार्यशाला उनके कौशल में वृद्धि करने में सहायक होगी और निश्चित रुप से इसका लाभ प्रकरणों के निराकरण में प्राप्त होगा।
उच्च न्यायालय में आयोजित कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए प्रशासनिक न्यायमूर्ति रोहित आर्या ने कहा कि मध्यस्थता के लिए पक्षकारों को प्रेरित करना जरुरी है। उन्होंने कहा कि लोगों को यह समझाना होगा कि मध्यस्थता के जरिए प्रकरणों का निराकरण अंतिम रुप से होता है। वहीं इससे होने वाले निराकरण से दोनों ही पक्ष संतुष्ट होते हैं क्योंकि इसमें न तो किसी की हार होती है और न किसी की जीत, इस कारण दोनों ही पक्षों में संबंध भी खराब नहीं होते हैं। उन्होंने कहा कि जब प्रकरणों का त्वरित गति से मीडियेशन के जरिए निराकरण होगा तो इससे न्यायालयों के प्रति लोगों का जो विश्वास है उस विश्वास में और वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि लोक अदालतों में प्रकरणों का निराकरण कराने के इच्छुक लोगों की संख्या लगातार बढऩे से मीडिएशन के प्रति और अधिक ध्यान दिया जा रहा है।
न्यायमूर्ति रोहित आर्या ने कहा कि न्यायालयों में कई मामले बिना आधार के आते हैं। ये मामले पक्षकारों के अहं के टकराव के कारण होते हैं। ऐसे मामलों को मध्यस्थता के जरिए निराकरण के लिए दिया जा सकता है वहीं इसमें मध्यस्थ की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। यदि वे प्रकरण के मनोविज्ञान को समझ सकें तो प्रकरण का निराकरण उतनी ही जल्दी हो सकता है। उन्होंने कहा कि भावनाओं और आवेश में आकर किए जाने वाले कई मामलों का मध्यस्थता के जरिए निराकरण किया गया है।
इस अवसर पर न्यायमूर्ति आनंद पाठक, न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया, न्यायमूर्ति डीके अग्रवाल उपस्थित थे। सुप्रीम कोर्ट के मास्टर ट्रेनर शाहिद मोहम्मद, रजिस्ट्रार डीएन मिश्रा, एजी हितेन्द्र द्विवेदी विशेष रूप से उपस्थित थे। इस विशेष कार्यशाला में 22 ट्रेंड मीडियेटर भी उपस्थित रहे। हाईकोर्ट के सभागार में आयोजित कार्यशाला शनिवार दोपहर तीन बजे तक चली। मीडियेटर्स को अपडेट करने के लिए आयोजित इस कार्यशालाा में वक्ताओं ने कहा कि मध्यस्थता के प्रकरणों का किस तरह मैनेजमेंट किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पक्षकार को मध्यस्थता के जरिए प्रकरण के निराकरण के लिए मीडियेटर में कौशल होना जरूरी हे। विभिन्न माध्यमों से यह कार्य किया जा सकता है। मीडियेटर की प्रकरणों में क्या भूमिका होनी चाहिए और उसके क्या नैतिक दायित्व हैं इस पर भी वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए। मीडियेटरों को बताया गया कि अधिकांश मामलों में जो गतिरोध होते हैं पहले उन्हें दूर करने के प्रयास होना चाहिए, दोनों ही पक्षों की सहमति से इसे दूर किया जा सकता है। इसके लिए बेहतर प्रबंधन भी जरूरी है।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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