बुढ़वा मंगल पर संकटमोचक के मंदिरों पर उमड़ा भक्तों का तांता लगा

Sep 06 2022

ग्वालियर। बुढ़वा मंगल पर मंगलवार को शहर के सभी प्रमुख मंदिरों में हनुमानजी की पूजा अर्चना के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। खासतौर से शहर के बालाजी धाम, गरगज के हनुमान मंदिर सहित अन्य मंदिरों पर सुबह से ही श्रद्धालु पहुंच रहे थे। बुढ़वा मंगल के बारे में कहा जाता है कि हनुमानजी ने वृद्ध का रूप लेकर भीम का घमंड तोड़ा था।
बुढवा मंगल के दिन संकटमोचक हनुमान जी के वृद्धरूप को पूजा जाता है। शहर के प्रमुख संकटमोचक मंदिरों पर सुबह से ही भक्तगणों का पहुंचने का सिलसिला प्रारंभ हो गया जो देर रात तक अनवरत रूप से जारी रहा। ऐसी मान्यता है कि बुढवा मंगल को संकटमोचक हनुमान जी के बूढे स्वरूप की पूजा करने से घर-परिवार और समाज में सुख-समृद्धिऔर शांति का वातावरण निर्मित होता है। 
मंगलवार को शहर के प्रमुख मंदिर खेड़ापति हनुमान मंदिर,गरगज के हनुमान मंदिर, तलवार वाले हनुमान मंदिर, पड़ाव पुल के नीचे स्थित संकटमोचक हनुमान मंदिर के अलावा दंदरौआ धाम पर विशष आयोजन किए गए। इन मंदिरों पर सुबह से ही बड़ी संख्या में भक्तगणों का आना प्रारंभ हो गया और भक्तगणों ने अपने आराध्य की पूजा- अर्चना कर घर-परिवार की सुख- समृद्धि के लिए कामना की।
ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया कि बुढ़वा मंगल उत्सव हनुमान जी के वृद्ध-बूढ़े रूप को समर्पित है। यह उत्सव भाद्रपद भादौं माह के अंतिम मंगलवार को आयोजित किया जाता है। जिसे प्रचलित भाषा में बूढ़े मंगल के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन हनुमान भक्त व्रत, पूजा, व्रत कथा, भजन-कीर्तन किया जाता है, हनुमान जी को चोला चढ़ाते है। 
ग्वालियर के खेड़ापति मंदिर, गरगज के हनुमान पर भक्तों की भीड़ लगी। लोगों ने जगह जगह अखंड रामायण का पाठ व सुंदरकांड का आयोजन व हवन एवं भंडारे कराए। मान्यता है कि इनकी पूजा से सभी प्रकार के कष्ट और बाधाओं से मुक्ति मिल जाती है। इसके अलावा इस दिन बजरंगबाण और हनुमान चालीसा का पाठ करना भी अच्छा माना गया है। माना जाता है कि इस दिन ऐसा करने से कष्ट दूर होते हैं।
बुढ़वा मंगल का इतिहास
महाभारत काल में हजारों हाथियों के बल को धारण किए भीम को अपने शक्तिशाली होने पर बड़ा अभिमान और घमंड हो गया था। भीम के घमंड को तोडऩे के लिए रूद्र अवतार भगवान हनुमान ने एक बूढ़े बंदर का भेष धारण कर उनका घमंड चूर-चूर कियाआगे यही दिन आगे चलकर बुढ़वा मंगल कहलाने लगा। एक अन्य मत के अनुसार रामायण काल में भाद्रपद महीने के आखिरी मंगलवार को माता सीता की खोज में लंका पहुंचे हनुमान जी की पूंछ में रावण ने आग लगा दी थी। हनुमान जी ने अपने विराट स्वरूप को धारण कर लंका को जलाकर रावण का घमंड चूर किया।