डोल ग्यारस से श्रीजी की विदाई का सिलसिला शुरू

Sep 06 2022

ग्वालियर। जलझूलनी एकादशी (डोल ग्यारस) मंगलवार को मनाई गई। डोल ग्यारस से ही गणेशजी की विदाई के साथ विसर्जन का सिलसिला शुरू हो जाता है। नगर के सागरताल सहित अन्य सरोवरों पर गणेश मूर्तियों के विसर्जन की व्यवस्था नहीं की गई है। डोल ग्यारस पर नगर निगम द्वारा मूर्तियों के विसर्जन की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। अगर मिट्टी की गणेशजी की मूर्ति विराजित की है तो घर में शुद्ध जल की व्यवस्था कर मूर्ति का विसर्जन किया जा सकता है। इस पानी को मिट्टी के गमलों में डालकर पौधे रोपे जा सकते हैं।
ज्योतिष के मुताबिक भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी बहुत ज्यादा धार्मिक महत्व है, इसे परिवर्तन एकादशी, डोल ग्यारस या जलझूलनी एकादशी भी कहते हैं। इस वर्ष यह पर्व मंगलवार को मनाया जा रहा है। इस दिन भगवान विष्णुजी की पूजा की जाती है। साथ ही इस दिन से ही गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन की शुरुआत होती है, ये सिलसिला अनंत चतुर्दशी तक जारी रहता है।