संयम के बिना बेकार हो जाता है हमारा जीवन, विषय भोगों से रहें दूर-मुनिश्री

Sep 05 2022

ग्वालियर। जैसे बिना ब्रेक की गाडी़ से आपका जीवन असुरक्षित है, उसी प्रकार बिना संयम के आपके गुणों का कोई महत्व नहीं है। बिना संयम के आपका जीवन व्यर्थ चला जाता है। जो आत्मकल्याण करना चाहते हैं वे संयम का पालन अवश्य करते हैं। उक्त उद्गार पर्यूषण पर्व के छठवें दिन सोमवार को माधवगंज स्थित चातुर्मास स्थल अशियाना भवन में धर्मसभा को संबोधित करते हुए कही।
मुनिश्री ने कहा कि संयम जिसके पास होता है वह विषयभोगों से मुक्त होकर शांति को महसूस करता है। शरीर की स्वस्थता, मन की पवित्रता, संस्कारों की प्राप्ति के साथ निरोगी काया मिलती है। जिनका आचरण संतुलित नहीं होता वे बिना ब्रेक की गाडी़ के समान हैं। आत्मतत्व को पाना चाहते हो तो संयम रूपी लगाम का होना आवश्यक है। बिना संयम के हमारा मन भी इधर-उधर भटक कर असंयम में अपने जीवन का अकल्याण कर सकता है। संयमी की यात्रा मजदूर से मालिक बनने की है। कंकर से शंकर बनने की है। असंयमी व्यक्ति अपने जीवन को व्यसनों में गंवा देता है। रात्रि ने सास्कृतिक कार्यक्रम में जैन मिलन विहर्ष महिला माधवगंज की ओर से सती मैना सुंदरी नाटक का मंचन किया गया।
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि पर्युषण पर्व पर मुनिश्री विनय सागर महाराज ससंघ से मुख्य अतिथि मध्य प्रदेश शासन के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा के भतीजे डॉ विवेक मिश्रा ने पहुँचकर श्रीफल भेंटकर मंगल आशीर्वाद लिया। डॉ विवेक मिश्रा ने कहा की जैन दर्शन कहता है कि जिओ ओर जीने दो येही जैन धर्म का मूल मंत्र है। हमेशा मुझे मुनिराजों का आशीर्वाद समय समय मिलता रहता है। 
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि प्रतिवर्ष दशलक्षण/पर्युषण महापर्व के अंतर्गत आने वाली भाद्रपद शुक्ल दशमी को दिगंबर जैन समाज ने सोमवार को सुगंध दशमी का पर्व मनाया गया। इसे धूप दशमी, धूप खेवन पर्व भी कहा जाता है। यह व्रत पर्युषण पर्व के दशमी को मनाया जाता है। इस पर्व के तहत जैन धर्मावलंबी शहर के सभी जैन मंदिरों में जाकर श्रीजी के चरणों में धूप अर्पित करते हैं। जिससे वायुमंडल सुगंधित व स्वच्छ हो जाता है। धूप की सुगंध से जिनालय महक उठते है।
सुगंध दशमी व्रत का दिगंबर जैन धर्म में काफी महत्व है और महिलाएं हर वर्ष इस व्रत को करती हैं। धार्मिक व्रत को विधिपूर्वक करने से मनुष्य के सारे अशुभ कर्मों का क्षय होकर पुण्य की प्राप्ति होती है तथा मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ ही इस व्रत का फल बताया गया है।
इस दिन शहर के सभी जैन मंदिरों में विशेष तौर पर साज-सज्जा, आकर्षक मंडल विधान सजाने के साथ-साथ मनोहारी झांकियों का निर्माण किया जाता है। इस अवसर पर सुगंध दशमी कथा का वाचन भी होता है। इस दिन जिनवाणी व पुराने शास्त्रों के सम्मुख धूप चढ़ाई जाती है ।