क्षमा मांगने की नहीं स्वयं के अंदर उतारने की आवश्यकता है-मुनिश्री
Aug 31 2022
ग्वालियर। शहर के दिगंबर जैन मंदिरों में दिगम्बर जैन समाज की ओर से पर्वराज पर्युषण पर्व का महोत्सव आगाज बुधवार को बड़े धूमधाम के साथ किया गया। दसलक्षण पर्व के आरंभ होने को लेकर जैन समाजजनों में अपूर्व उत्साह है। वही साधनामय बर्षयोग समिति, सहयोगी संस्था पुलक मंच परिवार एवं मुख्य संयोजक मनोज जैन, जैन कॉलेज के तत्वावधान में माधवगंज स्थित चातुर्मास स्थल अशियाना भवन में श्रमण मुनिश्री विनय सागर महाराज ससंघ के सान्निध्य में पर्युषण पर्व के पहला दिन उत्तम क्षमा धर्म के साथ साधनामय श्रावक संस्कार शिविर के श्रावकों ने भगवान जिनेंद्र के अभिषेक के साथ प्रारंभ हुआ।
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि मुनिश्री विनय सागर महाराज के सानिध्य व ज्योतिषाचार्य हुकुमचंद जैन के मार्ग दर्शन में इंद्रो ने कलशों से भगवान जिनेंद्र का जयकारों के साथ अभिषेक किया। मुनिश्री ने अपने मुखबिंद से भगवान की शांतिधारा नत्थीलाल रमेशचंद जैन, हुकुमचंद हिमांशु जैनव सरोज बोहरा परिवार ने की। इंद्रा-इंद्राणियो ने भगवान जिनेंद्र की भक्ति नृत्य करते हुए दीपो से भव्य आरती उतारी।
मुनिश्री विनय सागर महाराज के ससंघ सानिध्य में सुबह इंद्र-इंद्राणियो ने पीले वस्त्र धारण कर मुकुट माला पहनाकर नित्य नियम पूजा, दसलक्षण पूजा, उत्तम क्षमा धर्म पूजन भक्तिभाव मके साथ संगीतकार शुभम जैन सैमी एंड पार्टी की मधुर ध्वनि पर इंद्र-इन्द्राणियों ने भक्ति नृत्य करते हुए भगवान जिनेंद्र के समक्ष महाअर्ध्य समर्पित किए।
विश्व शांति के लिये प्रबल सूत्र है क्षमा धर्म-मुनिश्री
श्रमण मुनिश्री विनय सागर महाराज ने उत्तम क्षमा पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि क्षमा, धर्म, विश्व शांति का प्रबल मंत्र है। क्रोध न करें इसी का नाम क्षमा है, क्षमा मांगने की नहीं स्वयं के अंदर उतारने की आवश्यकता है। जैसे रूप का आभूषण गुण है, गुण का आभूषण ज्ञान है, ज्ञान का आभूषण क्षमा है ऐसे क्षमा धर्म को हमें अपने जीवन में हरपल अपनाना है वर्तमान में जो विश्व व्यापी समस्यायें जड़वत हैं छोटी-छोटी बातों में अहम् के कारण एक देश दूसरे देश से युद्ध की बात सोचते हैं और धमकियां देने लगता है, क्षमा धर्म को अपनाने से यह समस्या स्वमेव ही दूर हो जायेगी। विश्व शांति के लिये प्रबल सूत्र है क्षमा धर्म।
पर्यूषण पर्व पर श्रावक श्राविकाएं जैन से जिन बनने का अवसर
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि इन 10 दिनों में जैन से जिन बनने के लिए जैन साधनामय संस्कार शिविर में श्रावक-श्राविकाएं नियम और संयम का पालन करते हुए एकासन द्वारा आत्मा को कसने का उपक्रम किया जाता है। पर्युषण पर्व आत्मा के अनुसंधान का पर्व है। नियम, व्रत और उपवास से मन को दृढ़ बनाया जाता है। एकासन में श्रावक-श्राविकाएं एक स्थान पर बैठकर मौन पूर्वक भोजन करते हैं। पर्युषण पर्व के दौरान श्रावकों को नियम और संयम से रहते हैं साथ ही आकुलता न हो इसके लिए शक्ति अनुसार उपवास करते हैं।
दिगंबर जैन समाज में पर्युषण पर्व/ दशलक्षण पर्व के प्रथम दिन उत्तम क्षमा, दूसरे दिन उत्तम मार्दव, तीसरे दिन उत्तम आर्जव, चौथे दिन उत्तम सत्य, पांचवें दिन उत्तम शौच, छठे दिन उत्तम संयम, सातवें दिन उत्तम तप, आठवें दिन उत्तम त्याग, नौवें दिन उत्तम आकिंचन और दसवें दिन ब्रह्मचर्य। अंतिम दिन क्षमावाणी के रूप में मनाया जाता है। दशलक्षण पर्व के दौरान जिनालयों में धर्म प्रभावना की जाएगी।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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