स्वयं को विक्टिम समझ कर करे जांच-आर्या

Aug 28 2022

ग्वालियर। इंवेस्टीगेशन में गलतियों की वजह से अपराधी को तो लाभ मिलता ही है पुलिस को भी कोर्ट के सामने बार-बार खड़ा होना पड़ता है। पिछले कुछ महीनों में कई मौको पर कोर्ट ने पुलिस विवेचना में खामियां पकड़ी हैं। जिसको लेकर पुलिस अफसरों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हुए थे। विशेषकर गुना में पांच साल से लापता लड़की के केस के बाद पुलिस को ग्वालियर-चंबल अंचल के 8 जिलो के करीब 300 से ज्यादा सब इंस्पेक्टर को इंवेस्टीगेशन स्किल्स की ट्रेनिंग की जरुरत पड़ी है। शनिवार को ग्वालियर के आईआईआईटीएम संस्थान में शुरू हुए दो दिवसीय बिहेवियर एंड एटीट्यूशनल चेंज इन पुलिसिंग इंवेस्टीगेशन स्किल्स में अफसरों ने इंवेस्टीगेशन स्किल्स की बारीकियां सीखीं है। 
थाने में आने वाला पीडि़त आपसे मदद मांगने आता है, उसे विश्वास होता है कि पुलिस उसकी मदद करेगी। इसलिए जब भी किसी पीडि़त से बात करे खुद को विक्टिम मानकर उससे बातचीत करे, तो आप उसकी परेशानी समझ पाएंगे। यह बात आईआईआईटीएम संस्थान के सेमिनार हॉल में चल रही दो दिवसीय बिहेवियर एंड एटीट्यूशनल चेंज इन पुलिसिंग इंवेस्टीगेशन स्किल्स वर्कशॉप में मुख्य अतिथि प्रशासनिक न्यायमूर्ति रोहित आर्या ने कही। 
न्यायामूर्ति रोहित आर्या ने कहा कि विवेचना के दौरान आप सबसे ज्यादा डिजीटल साक्ष्य एकत्रित करें, जिससे अपराधी को बचने का मौका ना मिले। साथ ही आपकी विवेचना मजबूत होगी और कोई भी आप पर उंगली नहीं उठा सकता है। इसलिए समय-समय पर आप खुद को अपडेट करे। उससे आपकी इंवेस्टीगेशन की स्किल्स बेहतर होगी और अपराधी को लाभ नहीं मिलेगा। यहां न्यायामूर्ति आनंद पाठक ने कहा कि थानों में आने वाली छोटी-छोटी शिकायतों पर तत्काल एक्शन लें कई बार छोटी सूचनाओं व घटनाओं पर कार्रवाई बड़ी घटना को टाल देते हैं।
कार्यशाला में वर्चुअल शामिल हुए डीजीपी मध्य प्रदेश सुधीर सक्सैना ने कहा कि पुलिसिंग चुनौती भरा काम है और अपराधी भी खुद को अपडेट कर पुलिस से आगे निकलने का प्रयास करता है, इसलिए पुलिस को भी समय-समय पर अपडेट होकर अपराधी से आगे आना होता है, इसलिए खुद को अपडेट रखे।
गुना के एक केस के बार पड़ी जरुरत
बीते कुछ महीनों में कई मौके ऐसे आए जिसमें विवेचना में की गई चूक या गलतियों के कारण पुलिस को कोर्ट में खड़ा होना पड़ा। हाल ही में जुलाई माह में गुना का एक केस जिसमें पांच साल से लापता लड़की के मामले में पुलिस अफसरों की लापरवाही से जांच के कारण पिछली सुनवाई में एडीजी को हाईकोर्ट में खड़ा होना पड़ा था। उस समय एडीजी ने कहा था कि इस तरह की गलतियां इंवेस्टीगेशन में न हो इसके लिए एक रोड मैप तैयार कर वर्कशॉप करने जा रहे हैं। गुना के केस में एक लड़की पांच साल से लापता है। पुलिस उसे अभी तक नहीं तलाश पाई थी। दो संदेही पकड़े थे एक ने दुष्कर्म कर शव फेंकने की बात कही, लेकिन न शव मिला न दुष्कर्म के सबूत पुलिस जुटा पाई। जिस कारण लड़की का पिता ने कोर्ट में बेटी को तलाशने गुहार लगाई थी। जिस पर पुलिस को कोर्ट ने फटकार लगाई थी।
वर्कशॉप में न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया, न्यायमूर्ति आनंद पाठक, वर्चुअल रूप से डीजीपी सुधीर सक्सेना व कार्याशाला में पुलिस अफसर मौजूद थे। एडीजी ए सार्इं मनोहर, एडीजी ग्वालियर डी श्रीनिवास, एडीजी चंबल राजेश चावला, एसएसपी अमित सांघी सहित अन्य अफसर मौजूद रहे।