श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर गोपाल मंदिर में राधा-कृष्ण ने पहने बेशकीमती आभूषण

Aug 19 2022

ग्वालियर। जन्माष्टमी पर ग्वालियर के गोपाल मंदिर में भगवान राधा-कृष्ण ने 100 करोड़ के गहने पहने हैं। सिंधिया काल के गहनों में सोना, हीरा, नीलम, पन्ना, माणिक और पुखराज बेशकीमती रत्न जड़े हैं। यह गहने एंटिक हैं। मंदिर में सुबह से ही भक्तों का आना शुरू हो गया। रात 12 बजे कृष्ण जन्म तक भक्त भगवान के दर्शन कर सकेंगे।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर शुक्रवार को फूलबाग स्थित गोपाल मंदिर में राधा-कृष्ण को बेशकीमती गहने पहनाए गए। महापौर डॉ.शोभा सिकरवार सहित 13 लोगों की टीम ने सुबह 10 बजे कड़ी सुरक्षा के साथ बैंक पहुंचकर सोने-चांदी, पुखराज, माणिक, पन्नाजडि़त आभूषणों को निकाले और मंदिर पहुंचकर राधा-कृष्ण की मूर्तियों को पहनाएं।
सिंधिया कालीन सौ साल पुराने गोपाल मंदिर में मौजूद राधाकृष्ण की मूर्तियों को जन्माष्टमी पर खास जेवरातों से सजाया गया। जन्माष्टमी पर राधाकृष्ण बेशकीमती रत्न जैसे-हीरा, पन्ना, माणिक व पदम जडि़त आभूषणों से सुसज्जित किया गया। यह आभूषण एंटिक हैं और इनकी कीमत लगभग 100 करोड़ रुपए से भी ज्यादा है।
जन्माष्टमी पर गोपाल मंदिर की सुरक्षा में 200 से ज्यादा जवान व अफसर तैनात किए गए थे। शुक्रवार को बैंक से यह विशेष निगरानी में यह गहने निकालकर लाए गए और भगवान का श्रृंगार किया गया। इसके बाद शहर के लोगों को दर्शन के लिए मंदिर खोल दिया गया।
निगमायुक्त किशोर कन्याल ने गत गुरुवार रात को मंदिर पहुंचकर यहां की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। महिला-पुरुष दर्शनार्थियों के लिए शुक्रवार को यहां अलग-अलग लाइन रहीं। मंदिर में तीन बार आरती हुई। पहली आरती दोपहर 12 बजे, दूसरी शाम 7 बजे और तीसरी आरती रात्रि 12 बजे के जन्मोत्सव पर की गई। वहीं इस अवसर पर नगर निगम के इस प्रतिष्ठापूर्ण आयोजन के लिये गोपाल मंदिर पर विशेष साज-सज्जा व आर्कषक विद्युत व्यवस्था की गई है। 100 करोड़ रुपए से अधिक कीमत के बेशकीमती गहनों को रात्रि में ही टीम के सदस्य मूर्तियों से उतारकर बैंक में जमा कराएंगे।
मंदिर के बेशकीमती गहनों और भक्तों की सुरक्षा के लिए भारी पुलिस बल भी तैनात किया गया है। मंदिर के अंदर और बाहर की सुक्षा के लिए करीब 200 जवान तैनात किए गए हैं। वर्दीधारियों के साथ ही सादा वर्दी में सुरक्षा अमला तैनात है। गेट पर एएसपी व सीएसपी स्तर के अधिकारी इसकी मॉनिटरिंग कर रहे हैं। इसके साथ ही पूरा परिसर मैटल डिटेक्टर, सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में है। सुरक्षा ऐसी रहेगी कि परिंदा भी पर नहीं मार पाए।
सिंधिया रियासत में हुई थी गहनों से श्रृंगार की शुरुआत
फूलबाग चौराहे के पास स्थित गोपाल मंदिर की स्थापना 1921 में ग्वालियर रियासत के तत्कालीन शासक माधवराव सिंधिया प्रथम ने की थी। उन्होंने भगवान की पूजा के लिए चांदी के बर्तन और पहनाने के लिए रत्नजडि़त सोने के आभूषण बनवाए थे। इनमें राधा कृष्ण के 55 पन्ना जडि़त सात लड़ी का हार, सोने की बांसुरी, सोने की नथ, जंजीर और चांदी के पूजा के बर्तन हैं। जन्माष्टमी पर इन रत्नों जडि़त जेवरातों से राधा कृष्ण का श्रृंगार किया जाता है। इस बार भी 24 घंटे तक राधा-कृष्ण इन जेवरातों से श्रृंगारित रहेंगे। इस स्वरूप को देखने के लिए भक्त सालभर का इंतजार करते हैं। यही वजह है कि भक्तों का दर्शन के लिए तांता लगा रहता है। इनमें विदेशी भक्त भी शामिल रहते हैं।
शुक्रवार 19 अगस्त को जन्माष्टमी के अवसर पर भगवान की विशेष पूजा अर्चना हुई। गोपाल मंदिर में विराजमान राधाकृष्ण के विशेष श्रृंगार में हीरे के साथ माणिक, पन्ना, पुखराज और नीलम जडि़त गहनों का उपयोग किया गया। इन बेशकीमती गहनों को बैंक लॉकर में रखा जाता है। नगर निगम ग्वालियर के पास इनको निकालने व रखने का अधिकार होता है। जन्माष्टमी से पहले एक समिति बनाई गई थी। जो शुक्रवार को इन गहनों को बैंक लॉकर से निकालकर लाई और उनकी गणना करने के बाद उनसे राधा कृष्ण का श्रृंगार किया गया।
साल 2007 से लगातार हो रहा है श्रृंगार
देश की आजादी से पहले तक भगवान इन जेवरातों से श्रंगारित रहते थे, लेकिन देश आजाद होने के बाद से जेवरात बैंक के लॉकर में कैद पड़े थे। जो 2007 में नगर निगम की देखरेख में आए और तब से लेकर हर जन्माष्टमी पर राधा-कृष्ण की प्रतिमाओं को ये बेशकीमती जेवरात पहनाए जाते हैं, जन्माष्टमी के दिन सुरक्षा व्यवस्था के बीच इन जेवरातों को बैंक के लॉकर ले निकालकर राधा और कृष्णगोपाल का श्रंगार किया जाता है।
श्री गिर्राज मंदिर: सुबह पांच बजे हुआ भगवान का अभिषेक जिला सत्र न्यायालय के पास स्थित श्री गिर्राज मंदिर के पुजारी मुकेश बुधोलिया ने बताया कि शुक्रवार को सुबह पांच बजे भगवान श्रीकृष्ण का अभिषेक पंचामृत से किया गया। इसके बाद गोर्वधनधारी का श्रृंगार किया गया। फूलबंगला सजाया गया और छप्पन भोग के भी दर्शन हुए। रात 12 बजे तक मंदिर के पट खुले रहेंगे। इसी समय भगवान का जन्म होगा। उनकी विशेष आरती की जाएगी। मुरार में सदर बाजार श्री गिर्राज मंदिर और द्वारिकाधीश मंदिर में भी जन्मोत्सव मनाया जाएगा।
राममंदिर: आकर्षक विद्युत सज्जा की गई है मर्यादा पुरुषोाम श्रीराम व माता जानकी के विग्रह का अभिषेक कर विशेष श्रृंगार किया गया। भगवान का पालना भी सजाया गया। दिनभर भक्त भगवान के दर्शन करे। शाम पांच बजे से प्रसाद का वितरण किया गया। रात 12 बजे भगवान को जन्मोत्सव होगा। और आतिशबाजी की जाएगी। इसी तरह विष्णु मंदिर के पुजारी शक्ति ने बताया कि सुबह भगवान की आरती के बाद ब्राह्मणों द्वारा भगवान विष्णु व लक्ष्मी का अभिषेक दूध-दही और पंचामृत से मंत्रोच्चरण के साथ किया जाएगा। राममंदिर पर झूले लगना शुरू हो गए हैं। चौराहे पर मेला जैसे माहौल बना हुआ था।
लक्ष्मी नारायण मंदिर: मिल्क केक काटकर मनाया जन्मोत्सव जनकगंज स्थित श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर में जन्माष्टमी का उत्सव शुक्रवार और शनिवार को मनाया जाएगा। शुक्रवार को भगवान का फूलों का श्रृंगार किया जाएगा। इसके बाद उनके दशर्नों के लिए पट खोल दिए जाएंगे। भगवान श्री लक्ष्मीनारायण जी को हरे वस्त्र धारण कराए जाएंगे। पंडाल के चारों तरफ फूल-पो आदि लगाकर मधुवन का स्वरूप दिया जाएगा। भगवान लक्ष्मीनारायण जी को झूले पर विराजमान कर उनका फूलों के अलंकार जैसे-गले का हार, बाजू बंद, कमरपट्टा, पायजेब आदि पहनाए जाएंगे। ज्ञात हो यह झांकी शहर में केवल लक्ष्मी नारायण मंदिर में ही सजाई जाती है। जिसे देखने के लिए दूर-दराज से भक्त से आते हैं। झांकी शाम छह से रात्रि 10 बजे तक देखी जा सकती है। इसके बाद भगवान की आरती होगी। शनिवार की दोपहर भगवान का 51 किलो से दुग्धाभिषेक किया जाएगा। इससे पूर्व शुक्रवार को रात 12 बजे भगवान के पट खोले जाएंगे।