जिसके मन में सत्य का वास होता है, उसका चारित्र अपने आप ही शुद्ध हो जाता है-मुनिश्री

Aug 13 2022

ग्वालियर। जीवन में व्यक्ति को मन, वचन और शरीर के द्वारा सत्य का आचरण करना चाहिए। सत्य का संबंध केवल बोलने से ही नहीं, व्यक्ति के आचरण से भी रहता है। जिसके मन में सत्य का वास होता है, उसका चारित्र अपने आप ही शुद्ध हो जाता है। आज के इस भौतिक एवं वैज्ञानिक युग में जीवन के सुख-साधन अवश्य बढ़े हैं, लेकिन दुर्भाग्यवश सत्य से मानव की आस्था गिरी है। यह बात श्रमण मुनिश्री विनय सागर महाराज ने शनिवार को माधवगंज स्थित चातुर्मास स्थल अशियाना भवन में आयोजित 48 दिवसीय श्री भक्तामर महामंडल विधान में धर्मसभा को संबोधित करते हुए कही।
मुनिश्री ने कहा कि व्यक्ति का ऐसा विश्वास बन गया है कि झूठ के बिना उसे जीवन के विपुल सुख-साधन तथा समृद्धि प्राप्त नहीं हो सकती, इसलिए छल-कपट और धोखाधड़ी का आश्रय लेकर वह अपने अभीष्ट उद्देश्यों की पूर्ति में लगा रहता है। मुनिश्री ने कहा कि जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में इसीलिए आज परेशानियां दिखाई देती हैं और सर्वत्र अन्याय तथा अनीति का वातावरण बना हुआ है। इस से एक नहीं, अपितु सारे दुखी हैं। दुनिया के सभी महापुरुषों और धर्म ग्रन्थों ने झूठ को बुरा कहा है क्योंकि इसके परिणाम दुख और अशांति के रूप में जीवन में आते है, किंतु फिर भी व्यक्ति झूठ बोलता रहता है। झूठ बोलना व्यक्ति की दुर्बलता का ही नतीजा है। झूठ बोलने से व्यक्ति का विश्वास और उसकी साख दोनों गिरने लगते है। असत्य का मार्ग कांटों से परिपूर्ण होता है। सत्य का मार्ग सीधा, सपाट और सरल है। 
व्यक्ति को उतना ही मिलता है जितना उसके भाग्य में है
मुनिश्री ने कहा कि धर्म तन से नहीं मन से होता है। फल की सुरक्षा के लिए जितना छिलका जरूरी है उतना ही आत्मा की सुरक्षा के लिए धम्र जरूरी है। मन्दिर के पुजारी नहीं आत्मा के प्रेमी बनो। व्यक्ति को उतना ही मिलता है जितना उसके भाग्य में है। परमात्मा के दोष मत दो। व्यक्ति को अपना भाग्य स्वयं को ही बनाना पड़ता है। व्यक्ति जैसा कर्म करता है वैसे ही फल की प्राप्ति होती है। अच्छा कार्य करने से अच्छे फल की प्राप्ति होती है और बुरा कार्य करने से बुरे फल की प्राप्ति होती है लेकिन मनुष्य दोष परमात्मा को देते हैं। सुन कर जमाने की बातें, आप अपनी भक्ति मत बदल, यकीन रख अपने प्रभु पर, यूं प्रभु बार- बार मत बदल। परमात्मा का तो ही सन्देश है आप सोने से पहले सबको माफ कर देना और मैं तुम्हें जागने से पहले आप को माफ कर दूंगा। परमात्मा उसकी मदद करता है जो अपनी मदद स्वयं करता है।