मातमी धुनों के साथ इमामबाड़े में रखे ताजिए,12 दिवसीय शोक प्रारंभ

Jul 31 2022

ग्वालियर। इस्लामिक हिजरत को 1443 साल पूरे हो गए हैं। इस्लामिक कैलेंडर के नए साल हिजरी 1444 का आगाज रविवार से हुआ। नए साल पर इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हुए ताजियों का जुलूस निकाला गया। हिजरी कैलेंडर की शुरुआत पैगंबर इस्लाम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की हिजरत यानी मक्का छोडऩे से हुई। 31 जुलाई को पैगंबरे इस्लाम को हिजरत किए हुए 1443 वर्ष पूरे हो चुके हैं।
ग्रेटर ग्वालियर मोहर्रम एवं कर्बला इंतजामिया कमेटी के अध्यक्ष अख्तर हुसैन कुरैशी ने कहा कि कर्बला के अमर शहीदों की याद में परम्परागत 12 दिवसीय शोक प्रारंभ हो गया। इस अवसर पर मातमी धुनें बजाई गईं, चैकियां धोई गईं। चांद की रात इन रसूमातों में सभी समुदाय के लोग शरीक हुए। 9 अगस्त को हजरत इमाम हुसैन आली मकाम का यौमे-ए-शहादत मनाया जाएगा।
सिंधिया परिवार की चौकी धोई
नए साल की शुरुआत में गत 30 जुलाई शनिवार रात 8 बजे तक सभी तजियेदारों ने चौकियां धोईं और उन्हें इमामबाड़े में रखा। सिंधिया राज परिवार के ताजिये की चौकी धोई गई और गोरखी स्थित इमामबाड़े में रखा। कर्बला के शहीदों की याद में दस दिनों तक शहर में जगह-जगह तजियेदारी कर इमाम हुसैन को खिराजे अकीदत पेश की जाती है। वहीं पिछौरियों की पहाडिय़ा इमामबाड़े के अध्यक्ष नौशाद खान सुलतानी, बशीम खान ने बताया कि इमामबाड़े में मातमी धुनों के साथ गमे हुसैन मनाया जाएगा। मातमी धुनों के साथ ताजियों की सेहराबंदी कर फातिहा व तबर्रूक तकसीम किया जाएगा। इस दौरान हर घर से जरूरतमंदों के लिए लंगर वितरित किया जाएगा।