इंदरगंज चौराहे पर तिरंगे की बेकद्री

Jul 23 2022

ग्वालियर। केन्द्र सरकार राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा के प्रति लोगों का सम्मान बढ़े और उनमें राष्ट्र प्रेम की भावना जागृत हो इसके लिए आजादी के अमृत महोत्सव के उपलक्ष में हर घर तिरंगा अभियान चलाए जाने की देश भर में जोरदार तैयारी की जा रही है। ग्वालियर में इसके विपरीत ही धारा बह रही है। यहां तिरंगे का सम्मान नहीं उसकी बेकद्री हो रही है। इस बेकद्री के लिए जिम्मेदार है नगर निगम के अधिकारी और कर्मचारी। उन्हें अच्छी खासी सड़क पर सड़क बनाने, अच्छे खासे फुटपाथ को उखाडकर उसे बनाने, अमृत का अमृत पीने से ही फुर्सत नहीं है, ऐसे में उन्हें तिरंगे की बेकद्री कहां दिखेगी। 
स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त से पहले लोगों के अंदर देश प्रेम की भावनाएं जागृत होने लगती है। 15 अगस्त को उनका यह भाव सड़कों पर प्रकट भी होता है। इस बार जबकि हर घर तिरंगा अभियान 11 से 15 अगस्त तक बनाए जाने की तैयारियां चल रही हैं ऐसे में क्या किसी भी स्थिति में तिरंगे की बेकद्री होना चाहिए। हमारे शहर का एक सबसे व्यस्त चौराहा है इंदरगंज, इसे घोडा चौक भी कहते हैं, यहां पास में थाना है और जिला न्यायालय भी है। इस कारण यह चौराहा सुबह से लेकर रात तक अति व्यस्त रहता है। इस चौराहे से दिन भर में सैंकड़ों अधिकारी सरकारी वाहनों का आनंद लेते हुए इधर से उधर फर्राटे भरते हुए नजर आते हैं। ऐसा भी नहीं हो सकता कि वे आंख बंद करके निकलते हैं। लेकिन किसी की नजर तिरंगे की बेकद्री पर नहीं गई।
  वैसे इसकी जिम्मेदारी सबसे ज्यादा नगर निगम की ही है। क्योंकि यह बेकद्री उसके परिसर में हो रही है। एक सफाई कर्मी से लेकर नगर निगम आयुक्त किशोर कन्याल तक सभी रोज मैदान में होते हैं। उनका अपना एक पार्क विभाग भी है जिसके कर्मचारी तभी दिखते है जब कहीं पौधे लगाने का अभियान हो। वैसे चूक तो पार्क विभाग की ही सबसे अधिक है। इंदरगंज चौराहे पर आधुनिक ग्वालियर के निर्माता महाराजा माधव राव सिंधिया की प्रतिमा के चारो ओर लगे पेडों पर तिरंगे की बेकद्री हो रही है। यहां पिछली 26 जनवरी को पेडों को तिरंगे तो लपेट दिए गए लेकिन उन्हें निकाला नहीं। आखिर वे कब तक चलते धूप और पानी में वे खराब हो गए इसके बाद भी निगम ने उन्हें निकालने की कोई जुर्रत नहीं की। अब चिथड़े होकर लटक रहे है अब तो कम से कम तिरंगे का सम्मान करते हुए उन्हें उतार लिया जाए।