पानी का बुलबुला है जिंदगानी फिर भी अभिमानी.

Jul 22 2022

ग्वालियर। माधव बाल निकेतन एवं वृद्ध आश्रम लक्ष्मीगंज में पवित्र सावन के माह में भजन एवं सत्संग का आयोजन पूरे 1 माह चलेगा। इसी के अंतर्गत शुक्रवार को साध्वी मदालसा भारती संयोजिका दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान, साध्वी वीरभद्रा भारती दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की बहनों ने शुक्रवार को संगीतमयी सत्संग में बताया कि भक्ति ही भगवान को पाने का एक मात्र साधन है। उसके लिए सिर्फ अभिमान को त्यागना होगा। 
 माधव बाल निकेतन एवं वृद्ध आश्रम के चेयरमैन नूतन श्रीवास्तव ने बताया कि यह सत्संग एवं भजन वृद्ध माता-पिता ओं के लिए भगवान में कैसे मन लगे अपना बकाया जीवन कैसे हरि चरणों में व्यतीत करें इसके लिए है आयोजन किया गया है। शुक्रवार को सत्संग श्री दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की साध्वी बहनों मदालसा भारती, वीरभद्रा भारती द्वारा किया गया। इस अवसर पर वृद्ध माता-पिताओं ने पूरे मनोयोग से सत्संग का आनंद लिया। सबसे पहले आश्रम में स्थित माता के मंदिर का पूजन किया गया। माता को माला पहनाकर भोग लगाया गया। तत्पश्चात सत्संग करने आई  साध्वी बहनों का सम्मान किया। इसके बाद सत्संग में उन्होंने बताया कि भक्ति एक भक्त की असली पूंजी होती है जिससे भगवान उस भक्त पर बहुत प्रसन्न होते है। यही भक्ति उसे इस संसार में तथा उसके मृत्यु के बाद भी सुख व शांति प्रधान करती है। रामचरित मानस में कहा भी गया है .....
भक्ति स्वतंत्र सकल सुख खानी
बिनु सत्संग न पावहि प्राणी।।
भक्ति क्या है यही जिज्ञासा हमारे मन में रहती है...ईश्वर के साथ जुडऩा ही भक्ति है जो सतगुरु प्रदान करते है। इसके विपरित विभक्ति होती है, जिसका अर्थ है अलग होना।अर्थात ईश्वर से दूर रहना ही विभक्ति है।सतगुरु ईश्वर का दर्शन करवाते है तब भक्ति शुरू होती है। फिर जितनी जितनी भक्त सेवा, सुमिरन,साधना,गुरु दर्शन करता है उतनी उतनी उसकी भक्ति बढ़ती रहती है और ऐसी भक्ति बढ़ते बढ़ते शिष्य पूर्ण भक्त बन जाता है।जो फिर असंभव को भी संभव करने की सामर्थ्य उसके अंदर आ जाती है अपात्र को भी पात्र बनाने की सामर्थ्य उसके अंदर आ जाती है।अर्थात नर से नारायण इसी भक्ति से बन जाता है। लेकिन ये भक्ति पाने के लिए हमे संत की शरण में जाना पड़ता है। ऐसा हमारे धार्मिक ग्रंथ कहते है।
साध्वी ने भक्त शबरी का उदहारण देते हुए कहा कि उन्होंने भक्ति की सर्वोच्च अवस्था को प्राप्त किया था।भक्ति से ही मानव जीवन का कल्याण होता है। मानव को अपने भीतर मौजूद विकार रूपी रावण को मारना होगा। यह सभी विकार भक्ति से खत्म होंगें। साध्वी बहनों द्वारा भक्ति मय भजनों को गाकर मौजूद श्रृदालुओं को मंत्र मुग्ध कर दिया। इस अवसर पर माधव बाल निकेतन एवं वृद्ध आश्रम के अध्यक्ष पवन भटनागर, चेयरमैन नूतन श्रीवास्तव सचिव श्याम श्रीवास्तव संस्था अधीक्षिका सीमा सक्सेना, रुचि त्रिपाठी, राम दास मिश्रा, मनोज श्रीवास्तव, रेखा शुक्ला, शालिनी शुक्ला, और आसपास के भक्तजन भी एकत्र रहे। मुनिश्री विनय सागर के चातुर्मास कार्यक्रमों की पत्रिका हुआ विमोचन।