बढ़त बनाती कांग्रेस की शोभा

Jul 17 2022

ग्वालियर। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और नरेंद्र सिंह तोमर के गढ़ ग्वालियर में नगर निगम चुनाव के लिए मतों की गिनती जारी है। महापौर के लिए यह काम 35 राउंड में पूरा होगा और जिस रफ्तार से मतों की गिनती हो रही है उसे देख यह साफ दिख रहा है कि फाइनल नतीजा आते-आते देर रात हो जाएगी।
सबसे पहले डाकमत्र गिने गए और उसमें कांग्रेस प्रत्याशी शोभा सिकरवार ने जो बढ़त बनाई तो ईवीएम से हुए पहले तीन राउंड पूरा होने तक उनकी बढ़त का फासला बढ़ता ही गया। मतों की गिनती काफी धीमी है और पहले राउंड में शोभा सिकरवार को जहां 13 हजार 674 वोट मिले थे तो बीजेपी प्रत्याशी सुमन शर्मा के खाते में 12 हजार 297 वोट आए थे और शोभा सिकरवार 1377 वोटों से आगे थीं। वहीं तीसरे राउंड के पूरा होते तक यह बढ़त 7 हजार 281 वोट के आसपास पहुंच गई थी।
15वें राउंड में कांग्रेस की मेयर प्रत्याशी शोभा सिकरवार भाजपा के मुकाबले 23,881 वोटों से आगे हैं। कांग्रेस की शोभा सिकरवार को 2,13,454 जबकि भाजपा की सुमन शर्मा को 1,89,573 वोट मिले हैँ। आप प्रत्याशी रुचि गुप्ता 40,850 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर हैँ। वहीं, नोटा को 3,653 वोट मिले हैँ।  शाम 6 बजे तक 35 वार्ड, 25 काग्रेंस,1 वार्ड बीएसपी, 5 वार्ड निर्दलीय जीत चुके हैं। मेयर प्रत्याशी की कुल 35 राउंड में काउंटिंग होना है।
कांग्रेस को मिली संजीवनी बूटी
स्थानीय निकाय के चुनाव के रुझान और नतीजे आ रहे हैं वे कांग्रेस के लिए किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं है। वहीं भारतीय जनता पार्टी के लिए यह चिंता की बात ही नहीं खतरे की घंटी से कम भी नहीं हैं। स्थानीय निकाय चुनावों में भारतीय जनता पार्टी का लंबे समय से डंका बज रहा था पर अब कांग्रेस ने ही बीजेपी के कान के नीचे घंटी बजा दी है। इन चुनावों में कांग्रेस के लिए जो भी था, पाने के लिए ही था, खोने के लिए कुछ नहीं था क्योंकि प्रदेश में जो 16 नगर निगम हैं, उन सभी पर बीजेपी का कब्जा था। रविवार को 11 नगर निगमों के लिए मतों की गिनती हो रही है और इन नगर निगमों से कुछ भारतीय जनता पार्टी के हाथों से फिसलती नजर आ रही हैं।
यानी सत्तारूढ़ बीजेपी गंवा रही है और कांग्रेस कमा रही है। यह कांग्रेस के लिए शुभ संकेत है कि प्रदेश की जनता के मूड में बदलाव नजर आ रहा है और बीजेपी के रणनीतिकारों को तुरंत ही सोचने के लिए बैठना होगा कि भारी भरकम नेताओं की फौज स्थानीय निकाय चुनाव में उतारने के बाद भी जनता ने भाजपा पर भरोसा क्यों नहीं जताया है? कहीं ओवर कांफिडेंस तो भाजपा को नहीं डुबो रहा है? कार्यकर्ता की फौज कहीं हांफने तो नहीं लगी है? इस चुनाव में कांग्रेस की कमान कमलनाथ के हाथों में रही और वे ही पूरे प्रदेश में दम लगाते नजर आए और इससे इतर बीजेपी ने किसे इस रण में नहीं उतारा। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह पूरे प्रदेश में घूमे। जिस बड़े नेता की जिस क्षेत्र में धाक थी, वहां उन्होंने मोर्चा संभाला। रैलियां की। रोड शो में भीड़ जुटाई पर भीड़ वोट बैंक में तब्दील क्यों नहीं हो पाई? इस पर भी बीजेपी को मंथन करना होगा। यह साल 2022 का जुलाई का महीना है और अगले साल नवंबर में प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। यानी समय एक साल का ही बचा है और चुनौतियां काफी बड़ी हैं।
परिणाम देखने भटकते रहे लोग
प्रशासन ने महापौर और पार्षद पद के प्रत्याशियों के लाइव नतीजे जनता को दिखाने को लेकर कोई ठोस इंतजाम नहीं किए। शहर में 10 स्थानों पर लगे स्मार्ट सिटी के वैरिएबल मैसेज साइनेज (बीएमएस) डिस्प्ले बोर्ड पर अपडेट नहीं दिखा पा रहे थे। शहर में अन्य स्थानों पर परिणाम दिखाने का कोई इंतजाम नहीं था। 
इसलिए ज्यादातर समर्थक साइंस कॉलेज के आसपास भकटते रहे। इसलिए पुलिस को उन्हें खदेड़ती रही। राजनीति की इच्छा रखने वाले लोग अपने संग साथियों से मोबाइल पर अपडेट लेने का प्रयास करते रहे। मतगणना स्थल पर प्रशासन केवल महापौर के मतों की स्थिति अपडेट करता रहा। उमस अधिक होने से लोग छांव तलाशते रहे।
कार्यकर्ताओं में जोश
सात साल बाद हुए निगम चुनाव की मतगणना के रुझान को देखते हुए विधायक डॉ. सतीश सिकरवार की पत्नी पीएचडी डिग्री धारक डॉ. शोभा सिकरवार के समर्थक और कांग्रेसियों में उत्साह था।
मतगणना स्थल के आसपास, डॉ. सिकरवार के निवास और कांग्रेस कार्यालय में समर्थक पल-पल की जानकारी ले रहे थे। बढ़त मिलने की सूचना मिलते ही उनमें उत्साह भर जाता था। जारी मतगणना में मत पेटियों के पेट से यदि इसी तरह वोट निकलते रहे तो ग्वालियर में आजादी के बाद वे कांग्रेस की पहली महिला महापौर होंगी।