नमाज अदा कर एक-दूसरे के गले लगकर बोले-ईद मुबारक
Jul 10 2022
ग्वालियर। रविवार को ईद-उल-अजहा जिसे बकरीद भी कहते हैं बड़े ही धूम धाम और हर्षोल्लास के साथ मनाई गई है। मुस्लिम समाज के लोगों ने सुबह घर, ईदगाह और मस्जिद पहुंचकर विशेष नमाज अदा की और बाहर निकलकर एक दूसरे के गले लगकर बकरा ईद की मुबारकबाद दी। दो साल बाद ऐसा हो रहा है जब बकरीद पर कोरोना का साया नहीं है। सुबह से आसमान में बादल छाए हुए थे और मौसम खुशनुमा था। यह मौसम भी त्योहार की खुशियों को बढ़ा रहा था।
हजरत इब्राहीम अलैहिस्सलाम और उनके बेटे हजरत इस्माइल अलैहिस्सलाम की याद में हिजरी सन के आखिरी(बारहवें) महीने "जिल्हज्ज" की 10 तारीख को मनाया जाता है। इस साल 10 जुलाई को यह पर्व मनाया जा रहा है। ईद-ए-अजहा की नमाज ईदगाह के साथ-साथ शहर की सभी मस्जिदों में नमाज अदा की गई। ईदगाह, मस्जिद के अंदर ही नहीं बाहर सड़कों तक पर लोग नमाज अदा करते देखे गए हैं। नमाज पढऩे के बाद ईदगाह व मस्जिद के बाहर जश्न का माहौल देखने को मिला। लोगों ने एक दूसरे को गले मिलकर ईद की बधाइयां दीं। तीन दिन तक चलने वाले इस बकरा ईद के पर्व में तीन दिनों तक कुर्बानियां दी जाएंगी।
इस्लाम धर्म के बड़े त्योहारों में शामिल बकरीद पर हजारों लोगों ने सुबह 7 से 9 बजे के बीच बजे घर, ईदगाह और मस्जिदों में नमाज अदा की। बकरीद पर इस बार कोरोना का साया न होने के कारण कोई भी गाइड लाइन प्रशासन की ओर से जारी नहीं की गई है। हां यह त्यौहार अमन चैन और भाईचारे के साथ मनाया जाए इसको लेकर जिला प्रशासन और पुलिस ने लगातार तीन दिन से शांति समिति की बैठक कर यह सुनिश्चित किया है कि कोई माहौल बिगाडऩे का प्रयास न हो।
शहर काजी अब्दुल अजीज कादरी ने रविवार सुबह 8 बजे जीवाजीगंज ईदगाह में बकरीद की नमाज अदा की। साथ ही, सभी को ईद की बधाइयां दी। इस मौके पर उन्होंने संदेश में कहा कि ईद के त्योहार को सभी अमन और भाईचारे के साथ मनाएं। त्योहार के साथ-साथ शहर को सुरक्षित रखना भी हमारी जिम्मेदारी है।
रविवार को बकरीद के अवसर पर शहर की विभिन्न मस्जिद व ईदगाह में नमाज अदा की गई। शहर में मोती मस्जिद में नमाज अदा की गई है। यहां बाहर सड़कों तक लोगों की लाइन लगी थी। इसके साथ ही, मस्जिद हजरतजी दानाओली, मस्जिद काजमी गाढवे की गोठ, मस्जिद फर्राशखाना टोपी बाजार, मस्जिद बस स्टैंड मुरार, मस्जिद याहया खां आपागंज, मस्जिद दरगाह हजरत ख्वाजा खानून, मस्जिद रंगरेजान हुजरात पुल लश्कर, मस्जिद उस्मानी गेंडेवाली सड़क, मस्जिद कुरैशियान नूरगंज, शाही जामा मस्जिद फोर्ट ग्वालियर, मस्जिद सुनहरी फालका बाजार, मस्जिद गाड़ीवालान ग्वालियर, मस्जिद एक मीनार आपागंज, मस्जिद दरगाह हजरत मेहराव शाह दाता, मस्जिद अकबरी शर्मा फार्म हाउस, मुस्जिद पुराना हाईकोर्ट, मस्जिद सिकंदर कंपू, मस्जिद हजरत मोहम्मद गौस की दरगाह हजीरा, मस्जिद जिन्नातों की रामाजी का पुरा, मस्जिद आसमानी नाकाचन्द्रवदनी गली नंबर एक लश्कर, मस्जिद नालबंदों की तारागंज लश्कर, मुरार, कंपू व जीवाजीगंज ईदगाहों में नमाज अदा की गई।
कुर्बानी के किए जाते हैं तीन हिस्से
बकरीद पर लोग बकरों की कुर्बानी देते हैं। कुर्बानी के गोश्त को तीन हिस्सों में बांटा जाता है। इसमें एक हिस्सा गरीबों में बांटा जाता है, जबकि दूसरा हिस्सा अहबाब (रिश्तेदारों) के लिए और तीसरा हिस्सा घर में उपयोग के लिए रखा जाता है। वहीं, बकरे की खाल को मस्जिदों को दान कर दिया जाता है।
पैगम्बर हजरत इब्राहिम को सपने में अल्लाह ने आदेश दिया कि वह अपनी सबसे प्यारी चीज को कुर्बान कर दें। पैगम्बर हजरत इब्राहिम ने अपने बेटे की कुर्बानी दी, लेकिन जब उन्होंने अपनी आंखें खोली तो उनका बेटा सामने खेल रहा था, जबकि उनके बेटे के स्थान पर बकरा आ गया, जिसकी कुर्बानी अल्लाह ने कुबूल की थी। तभी से बकरीद पर बकरे की कुर्बानी की रस्म शुरू हुई।
ईदगाह में मुस्लिमों को मुबादक देने के लिए शहर के गणमान्य व राजनीतिक लोग ईदगाह पहुंचे और गले मिलकर मुबारक बाद दी। इसके साथ ही त्योहार को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था चौकस की थी। जिससे किसी तरह की अप्रिय स्थ्तिति न बने। साथ ही नगरनिगम ने भी ईदगाह व मस्जिदों के पास साफ सफाई की विशेष व्यवस्था की थी। जिससे किसी को कोई परेशानी न हो।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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