पर्ची वितरण में मोहल्ले के मोहल्ले उड़ा दिए, वोटरों में काफी आक्रोश

Jul 06 2022

ग्वालियर। पर्ची वितरण में बरती गई लापरवाही ने हजारों मतदाताओं को निराश कर दिया। कई कॉलोनियां और मोहल्ले में कर्मचारी नहीं पहुंचे। इसका असर बुधवार की सुबह मतदान शुरू होने के बाद देखा गया। मतदाता सुबह पोलिंग बूथों पर वोटर भटकते रहे। वे पहचान पत्र लेकर पहुंचे। मतदान में लगे कर्मचारियों को उनका नाम खोजने में काफी समय लगा। पर्ची न मिलने पर वोटरों में काफी आक्रोश देखा गया। 
सुबह से ही मतदान केंद्रों पर मतदाताओं के सामने समस्या आई। वे मतदान केंद्रों पर पहुंचे और जब वोट देने पहुंचे तो मतदाता सूची में उनके नाम नहीं मिले। सूची में नाम न होने से मतदान कर्मियों ने उनहें वोट नहीं डालने दिया। इसके बाद वे निराश होकर लौट आए। ऐसा ही कुछ मुरार में भी हुआ। प्रगति विद्यापीठ मुरार के मतदान केंद्र पर रमेश अपनी धर्मपत्नी हेमा रमेश के साथ मतदान केंद्र पर पहुंचे तो उन्हें अपना मतदान केंद्र ढूंढने में हुई परेशानी। उनके बेटे राहुल का नाम सूची मे मिला लेकिन उन्हें निराश होकर बिना मतदान के लौटना पड़ा। 
इस बार निगम को सौंपी जिम्मेदारी
नगर निगम के चुनाव 8 साल बाद हो रहे हैं। 2018 में विधानसभा और 2019 में लोकसभा चुनाव हुए। पहले पर्ची वितरण व्यवस्था शिक्षा विभाग और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के हवाले थी, लेकिन इस बार नगर निगम को यह जिम्मा सौंपा गया। निगम के जिम्मेदारों ने लापरवाही बरती। मतदान पर्ची घरों तक नहीं पहुंचाई। इससे मतदाता काफी परेशान रहे। नगर निगम ने लापरवाही पर दो कर संग्रहक निलंबित कर खानापूर्ति कर दी। मतदान में मतदाता पर्ची को ही प्रमुखता देते हैं। वोटर लिस्ट में नाम और मतदान केन्द्र का पता लगाने में यही पर्ची सबसे ज्यादा उपयोगी साबित होती है इसलिए पर्ची के अभाव में कई मतदाता तो वोट डालने ही नहीं पहुंचे। 
पति कहीं तो पत्नी को दूसरी जगह भेजा
मतदान केन्द्रों की गड़बड़ी के कारण एक ही घर के सदस्यों का बंटवारा कर दिया। पति-पत्नी के भी केन्द्र बदल दिये। वार्ड 51 आपागंज निवासी शांतीलाल के परिवार में 5 सदस्य हैं लेकिन 2 व 3 सदस्यों को अलग-अलग केन्द्र पर भेज दिया।
हवा, पानी के झूठे दावे, परेशान रहे कर्मचारी
मतदान केन्द्रों पर ठंडा पानी, हवा के लिए पंखे और लाइन विहीन मतदान के जिला व नगर निगम प्रशासन के दावे झूठे निकले। कई क्षेत्रों पर ठंडा पानी नहीं पहुंचा तो कहीं कुर्सियों की संख्या कम रही जिससे वोट डालने के लिये मतदाताओं को लाइन में खड़ा होना पड़ा।