पुरी से भगवान जगन्नाथ, बलदाऊ व बहन सुभद्रा के साथ कुलैथ पहुंचे, निकली रथ यात्रा

Jul 02 2022

ग्वालियर। आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितीय शुक्रवार की देर शाम को भगवान जगन्नाथ, बलदाऊ व बहन सुभद्रा के साथ पुरी से कुलैथ पहुंचे। इसके साथ ही रथ यात्रा का शुभारंभ हुआ। भगवान जगन्नाथ के जयकारों के साथ भक्तों ने रथ को खींचा। भगवान जगन्नाथ ने गांव की परिक्रमा की। गांव के ही देवी मंदिर में यात्रा को विश्राम दिया गया। रथ यात्रा शुरू करने से पहले भगवान के सामने चावल से भरे घट रखे, जो कि स्वत: चार भागों में बंट गए। उसी भात का भोग लगाने के बाद श्रद्धालुओं को वितरित किया गया। रथ यात्रा के साथ कुलैथ में दो दिवसीय मेला शुरू हो गया है। शहर के अलावा आसपास के क्षेत्रों से भगवान जगन्नाथ के दर्शनों के लिए आए हैं। दो साल से कोरोना संक्रमण के कारण रथ यात्रा नहीं निकली थी।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान जगन्नाथ के अस्वस्थ होने पर 23 जून को मंदिर के पट बंद कर दिए गए थे। सात दिन तक भगवान के विश्राम के बाद गुरुवार को पट खोले गए और भगवान का श्रृंगार किया गया। भक्तों का गुरुवार से कुलैथ पहुंचना शुरू हो गया था। मंदिर में विधि विधान के अनुसार पूजा-अर्चना की गई और भगवान का विशेष श्रृंगार किया गयाा। उसके बाद रथ यात्रा की तैयारी शुरू हो गई। परंपरागत तरीके से पुजारी ने भगवान जगन्नाथजी, बलदाऊ व बहन सभुद्रा को कुलैथ पधारने का आमंत्रण दिया गया। ऐसी मान्यता है कि पुरी आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया को पुरी में निकलने वाली जगन्नाथ यात्रा को शाम चार बजे के लगभग विश्राम दिया जाता है। इसी विश्राम के दौरान भगवान जगन्नाथ बलदाऊ व बहन के साथ यहां पधारते हैं। इस समय भगवान की प्रतिमाओं का स्वरूप बदल जाता है और पुजारी को इस बात का आभास होता है कि भगवान जगन्नाथ कुलैथ पधार चुके हैं।
दो साल के अंतराल के बाद भगवान जगन्नाथजी, बलदाऊ व सुभद्रा की प्रतिमाओं को श्रद्धाभाव के साथ रथ में बैठाया। इसके बाद भक्तों ने गांव की परिक्रमा के लिए हाथों से रथ को खींचा। रथ यात्रा में शामिल भगवान जगन्नाथ के जयकारे लगा रहे थे। श्रद्धालुओं के चेहरों पर भक्ति और श्रद्धा के साथ यह भाव था कि साक्षात भगवान जगन्नाथ के दर्शन हो गए। उनकी सारी परेशानियां दूर हो गईं।
रथ यात्रा गांव की परिक्रमा के बाद देवी मंदिर में विश्राम दिया गया। शनिवार सुबह फिर रथ यात्रा प्रारंभ हुई। भगवान जगन्नाथ, बलदाऊ व बहन सुभद्रा के विग्रह के बाद अपने मूल मंदिर पहुंचें जहां भोग के लिए फिर घट रखे जाएंगे। यह घट स्वत: चार भागों मेंं विभक्त हो जाते हैं और उसी भात का प्रसाद भक्तों में बांटा जाता है। दो दिन तक कुलैथ में मेले जैसा माहौल रहता था। हजारों की संख्या में भगवान का चमत्कार देखने के लिए भक्त आते हैं और लोगों की मन्नतें भी पुरी के जगन्नाथ कुलैथ में पधारकर पूरी करते हैं।