धन तन के लिए नहीं बल्कि दिखाने के लिए ज्यादा कमाना पड़ता है: मुनिश्री

Jul 01 2022

ग्वालियर। व्यक्ति को हमेश डर बना रहता है कि मेरा धन कही चला नहीं जाए। यह धन नश्वर है। जब आराम करने की फुर्सत नही है तो धन क्यो कमा रहे है। धन जीने के लिए ज्यादा नही चाहिए होता है। धन तन के लिए ज्यादा नही कमाना पड़ता है बल्कि दिखाने के लिए पड़ता हैं। यह विचार श्रमण मुनिश्री विनय सागर महाराज ने शुक्रवार को गुड़ागुड़ी का नाका स्थित नवीन जिन मंदिर पार्श्वनाथ दिगंबर जैन वरैया मंदिर की वेदी प्रतिष्ठा व शिखर कलश रोहण में धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। मंच क्षुल्लक समर्पण सागर महाराज भी मौजूद थे। 
महोत्सव के सह विधानचार्य पंडित चंद्रप्रकाश जैन चन्दर ने मंत्रो से साथ इंद्रो ने पीले वस्त्र धरण कर भगवान पार्श्वनाथ का कलशों से जयकारों कब साथ अभिषेक किया। वही शांन्तिधार के साथ आरती की गई। महोत्सव के कल्याण मंदिर विधान में पूजा के साथ संगीतकार अनुपमा जैन के भजनों पर भक्ति नृत्य करते हुए महा अर्ध्य समर्पित करें। अतिंम दिन विश्वशांति महायज्ञ का आयोजन किया गया। जिसमें इंद्र-इंद्राणियों ने हवन कुंड में मंत्रो के द्वारा आहुति डालकर भगवान जिनेन्द्र से विश्वशांति की मनोकामना की।