प्रत्याशी उतरे मैदान में सुबह-शाम अपने वार्डों में घर-घर दस्तक दे रहे प्रत्याशी

Jun 26 2022

ग्वालियर। नामांकन प्रक्रिया खत्म होने के बाद से अब मतदाताओं को लुभाने के लिए प्रत्याशी गली-मोहल्लों में घूम रहे हैं। मतदाताओं को तरह-तरह के प्रलोभन और वादे कर अपने लिए वोट मांग रहे हैं। जनता का मूड भी इस बार कुछ अलग नजर आ रहा है। इसका साफ कारण यह है कि ग्वालियर नगर निगम में लगभग पिछले 35 सालों से भाजपा का कजा रहा है। इतने सालों में भी शहर का विकास ठीक से नहीं हो पाना ही इसकी खास वजह है।
शहर में अब चुनाव का बिगुल बज चुका है। गली-मोहल्लों में अब चुनाव का शोर सुनाई देने लगा है। प्रत्याशी अपने-अपने तरीकों से मतदाताओं को अश्वासन दे रहे हैं। वार्ड की समस्याओं सड़क-पानी और साफ-सफाई को दुरुस्त करने का वादा कर वोट की मांग कर रहे हैं। अब देखना यह है कि जनता किस दल पर अपना विश्वास दिखाती है।
पिछले लगभग 35 सालों से निगम पर भाजपा का कब्जा रहने के बावजूद शहर में कई विकास के कार्य और प्रोजेटों का अधूरा रहने की वजह से जनता अब बदलाव चाहती है। शहर की सड़के हो या साफ-सफाई की व्यवस्था इन सबसे जनता रुष्ट नजर आ रही है। इसी प्रकार फूलबाग से किले तक रोप वे प्रोजेट को शुरू न कर पाने की वजह भी जनता भाजपा को मानती है। इन सभी कारणों से जनता इस बार नगर निगम में बदलाव देखना चाह रही है।
भाजपा की कमजोर स्थिति का एक कारण यह भी है कि पुराने कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर नए चेहरो पर दांव लगाना भी है। कई सीटें जो कि सामान्य थी फिर भी वहां पर ओबीसी दावेदारों को टिकट बांटने से सामान्य वर्ग में खासी नाराजगी है। वहीं कांग्रेस ने शिक्षित व परंपरागत प्रत्याशियों पर दाव खेला है। जो कि इनके पक्ष में जा सकता है। वर्षों से टिकट की राह देख रहे भाजपा के कई वरिष्ठ दावेदार भी टिकट न मिलने से नाराज हैं और वे चुनाव में भाजपा का समीकरण बिगाड़ सकते हैं।
वोटरों को अपने पक्ष में करने के लिए प्रत्याशी सुबह-शाम अपने समथर््ाकों व कार्यकर्ताओं के साथ मतदाताओं के घरों पर दस्तक दे रहे हैं। जनता का आशीर्वाद लेने के लिए दिन-रात एक कर रहे हैं। जनता से जलकर व संपाि कर में कमी करने व वार्ड को चमकाने का वादा भी कर रहे हैं। अब देखना यह है कि जनता किसे अपना प्रतिनिधि चुनती है।
कांग्रेस हो सकती है बेहतर विकल्प
लगातार निगम में भाजपा को देखकर जनता ऊब चुकी है, ऐसे में जनता को कांग्रेस एक बेहतर विकल्प के रूप में नजर आ रही है। मतदाताओं का यह सोचना है कि इतने वर्षों तक भाजपा का कार्यकाल देख लिया अब बदलाव होना चाहिए। जिससे शहर के ठप्प पड़े विकास कार्यों को सुचारू गति मिल सके। कांग्रेस पार्टी ने इस चुनाव में कई शिक्षित और योग्य प्रत्याशियों पर दांव खेला है। आने वाले समय में हो सकता है बदलाव का ये रुख नगर निगम परिषद में भी दिखाई दे।