सट्टे की लत के कारण ग्वालियर का पेठा व्यापारी बना शातिर ठग वह अब सलाखों के पीछे है
Jun 08 2022
ग्वालियर। ग्वालियर का मशहूर पंछी पेठा जिसका संचालक वरुण उर्फ राहुल बंसल अब शातिर ठग बन गया है। अय्याशी, जुआ और सट्टे की लत ने शहर के एक बड़े व्यापारी को शातिर ठग बना दिया। पहले ग्वालियर में भारी कर्ज लिया तो यहां से भागना पड़ा, फिर भोपाल में तीन दोस्तों के साथ मिलकर ठगी की दुकान खोल ली। चार पहिया गाडिय़ों को किराए पर लेने का झांसा देकर करीब तीन सौ गाड़ी मालिकों से गाडिय़ां किराए पर लीं। इन्हें दूसरों को बेच डाला और यह पैसा ब्याज पर चला दिया। फर्जीवाड़ा तब खुला जब गाड़ी मालिकों को न तो उनका पैसा मिला और न ही गाड़ी वापस मिली। इस तरह ठगी कर उसने करोड़ों रुपये कमाए। हाल ही में उसे भोपाल पुलिस ने पकड़ा है, वह अब सलाखों के पीछे है।
1969 में पंछी पेठा के नाम से दुकान की शुरुआत हुई थी। वरुण के पिता योगेश बंसल ने शुरुआत की थी। पंछी पेठा शहर का प्रसिद्ध नाम हो गया। ग्वालियर में पेठे का नाम आते ही पंछी पेठा की दुकान का नाम लिया जाता था। योगेश ने पेठे के व्यापार में मोटा पैसा कमाया। जब तक कारोबार उनके हाथ में था कारोबार खूब बढ़ा।
योगेश का वरुण उर्फ राहुल इकलौता बेटा था इसलिए उसकी हर ख्वाहिश वह पूरी करते थे। उसे गाडिय़ों का शौक था, लक्जरी गाडिय़ां खरीदता था और इन्हें बेच देता था। जब कारोबार की जिम्मेदारी उसके हाथ में आई तो उसने अय्याशी शुरू कर दी। जुए और क्रिकेट पर सट्टे की लत उसे लग गई। उसने लोगों से कर्ज लेना शुरू कर दिया। व्यापार पर ध्यान नहीं दिया और इस तरह कारोबार चौपट होने लगा। बैंक से भारी कर्ज लिया, जब यह कर्ज नहीं चुकाया तो फालका बाजार स्थित मकान नीलाम हो गया।
पूरा परिवार सड़क पर आ गया। करीब 12 हजार वर्गफीट के मकान और दुकान से किराए के कमरे में रहने लगा। उसने जिन लोगों से कर्ज लिया, वह लोग कर्ज मांगने लगे तो यह भाग गया। इंदरगंज थाने में एफआइआर दर्ज हुई। इंदरगंज पुलिस ने 2018 में उसे गिरफ्तार किया। पकड़े जाने से पहले वह इंदौर में व्यापार कर रहा था, जब गिरफ्तार हुआ तो इंदौर का व्यापार चौपट हो गया।
जेल से छूटने के बाद वह भोपाल पहुंचा। यहां अपनेे साथी रविकांत विश्वकर्मा, सतेंद्र भदौरिया और राहुल शर्मा के साथ मिलकर टेक्सिडो कंपनी खोली। इसी के जरिये ठगी का प्लान बनाया।
टेक्सिडो कंपनी में उसने किराए पर गाडिय़ां लेने का व्यापार शुरू किया। उसने भोपाल के कार मालिकों से संपर्क किया, इनकी गाडिय़ां किराए पर लीं। फिर इन गाडिय़ों को ग्वालियर, मुरैना, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, भिंड के लोगों को बेचा। पांच से छह लाख रुपये में एग्रीमेंट कर गाडिय़ां बेच डालीं। जब गाड़ी मालिकों को किराया नहीं मिला तो इन्होंने रुपये मांगे। रुपये न देने पर गाड़ी मांगी तो गाडिय़ां भी वापस नहीं मिलीं। इसके बाद 60 व्यापारियों ने एमपी नगर थाने पहुंचकर शिकायत की और इस मामले में एफआइआर दर्ज की गई। ग्वालियर पुलिस से भी भोपाल पुलिस ने संपर्क किया है, जिससे गाड़ी मालिकों की गाडिय़ां वापस कराई जा सकें। वह एफआइआर के बाद भाग गया, उसे बड़ौदा से पुलिस ने पकड़ा। वह वहां समोसे और पेठे का ठेला लगा रहा था।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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