रोहित समझकर जिसका किया था अंतिम संस्कार, वह अजय निकला

May 31 2022

ग्वालियर। रोहित समझकर शिंदे की छावनी पर रहने वाले कुशवाह परिवार ने जिसका अंतिम संस्कार कर दिया था, उसकी शिनाख्त मौत के करीब 27 दिन बाद हो गई है। वह सिकंदर कंपू का रहने वाला अजय कुशवाह है और वह मजदूरी करने के लिए निकला था, इसके बाद घर नहीं लौटा। जब मृतक का भानजा कोतवाली थाने पहुंचा और उसने फोटो से अपने मामा को पहचान लिया तो पिछले कई दिनों से परेशान पुलिस ने राहत की सांस ली। अभी अजय अस्थियां पुलिस के ही कब्जे में हैं। अजय का परिवार उसकी अंतिम क्रिया तो नहीं कर पाया, लेकिन अब अस्थि विसर्जन करेगा। उसकी मौत की खबर से सिकंदर कंपू के रहने वाले कुशवाह परिवार में मातम छा गया, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था।
महाराज बाड़ा स्थित पार्क में चार मई को एक युवक की लाश मिली थी। उसके मुंह से झाग निकल रहा था। शव को कोतवाली पुलिस ने पोस्टमार्टम हाउस में रखवाया। इसके बाद उसकी शिनाख्ती के प्रयास किए गए। इसी दौरान शिंदे की छावनी का रहने वाला रोहित कुशवाह लापता हो गया था। जब उसके स्वजन को पता लगा तो वह पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। रोहित का एक हाथ खराब था और मृतक भी एक हाथ से दिव्यांग था, एक जैसी कद काठी होने की वजह से परिजन गफलत में आ गए। उन्हें लगा यह रोहित ही है। पोस्टमार्टम के बाद स्वजन ने अंतिम संस्कार कर दिया। जब परिवार अस्थियां लेकर आ रहा था, तब रोहित घर पहुंच गया। इसके बाद परिजन आश्चर्यचकित रह गए, तब उन्हें पता लगा कि उन्होंने किसी और का अंतिम संस्कार कर दिया। पुलिस ने अस्थियां जब्त कर लीं।
अजय कई-कई दिन तक घर नहीं आता था। वह शराब पीने का आदी था, इसके चलते अक्सर उसके घर पर झगड़ा होता था। करीब 20 दिन तक तो स्वजन ने इंतजार किया, जब वह नहीं लौटा तो अजय की पत्नी कमलेश ने अपने भांजे को उसे तलाशने भेजा।
आकाश कुशवाह निवासी सिकंदर कंपू थाने पहुंच गया। वह कोतवाली पुलिस से बोला- उसके मामा अजय कुशवाह पुत्र स्व. सीताराम कुशवाह महाराज बाड़े पर मजदूरी करने आते थे और यहां से लापता हो गए। पुलिस को संदेह हुआ, उसे मृतक की वह फोटो दिखाई गई, फोटो देखते ही वह पहचान गया। मृतक की पहचान अजय के रूप में हुई। वह सिकंदर कंपू का रहने वाला है और मजदूरी करता था। पुलिस को उसने मृतक का आधार कार्ड भी दिखाया, जिससे पुलिस ने मिलाया तो वही निकला। अब पुलिस कागजी कार्रवाई कर उसे अस्थियां सुपुर्द करेगी।