टेकनपुर में बीएसएफ ने प्रशिक्षित किया पहला ड्रोन डिटेक्टर श्वान

May 28 2022

ग्वालियर। ग्वालियर की टेकनपुर स्थित सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) अकादमी के राष्ट्रीय श्वान प्रशिक्षण केंद्र ने देश का पहला और इकलौता ड्रोन डिटेक्टर श्वान प्रशिक्षित किया है। दुनिया में इजरायल और अमेरिका के बाद भारत ऐसे देशों की श्रेणी में आ गया है जिनके पास ड्रोन के जरिए बार्डर पर नशीले पदार्थ और हथियारों की तस्करी को रोकने के लिए प्रशिक्षित श्वान है। यह जर्मन शेफर्ड नस्ल की चार साल की मादा श्वान है जो पाकिस्तान से सटे वाघा बार्डर पर तैनात है। ड्रोन डिटेक्शन के लिए विशेष तरह की दो माह की फील्ड और अकादमी ट्रेनिंग के बाद यह श्वान तैयार हुआ है। देशभर में ऐसे श्वानों की मांग बढ़ रही है। जिसके लिए बीएसएफ अब और भी श्वानों को ट्रेनिंग देगा।
अकादमी में तैयार किया बार्डर जैसा माहौल
राष्ट्रीय श्वान प्रशिक्षण केंद्र के कमान अधिकारी ने बताया कि फ्रूटी को दो माह तक ड्रोन डिटेक्शन का विशेष प्रशिक्षण दिया गया। उसे उड़ते ड्रोन की आवाज ऊंचाई और नजदीक से, पंखों की आवाज सुनाई गई। दिन और रात की ड्रोन की आवाज को अलग-अलग भी सुनाया गया। उसे ड्रोन में जलती बत्तियों को दिखाया गया। अकादमी परिसर में प्रशिक्षण के लिए बार्डर जैसा कृत्रिम माहौल तैयार किया गया। पूरी तरह दक्ष करने के बाद उसे अटारी बार्डर भेज कर उसके कुशलता का परीक्षण किया गया। इसके बाद अब उसकी तैनाती वाघा बार्डर पर कर दी गई है।
बीएसएफ अकादमी के राष्ट्रीय श्वान प्रशिक्षण केंद्र में ही जन्मी फीमेल श्वान का नाम फ्रूटी रखा गया है। ड्रोन डिटेक्शन का प्रशिक्षण फ्रूटी को एक अन्य श्वान रैंबो के साथ दिया गया था, जिसे अटारी बार्डर पर तैनात किया गया लेकिन उसकी मौत हो गई। फ्रूटी देश की इकलौती ड्रोन डिटेक्टर श्वान है।
फ्रूटी का ही चयन क्यों: जर्मन शेफर्ड ब्रीड की फ्रूटी का चयन इसलिए किया गया क्योंकि इसके कान ज्यादा संवेदनशील हैं। वैसे इस ब्रीड के कान बड़े और संवेदनशील होते हैं। इस ब्रीड के कान खड़े होते हैं, जिनकी सुनने की शक्ति अधिक प्रभावी होती है।