बुंदेला विद्रोह" नाटक से याद किया बुंदेलखंड के भूले बिसरे क्रांतिकारियों को

May 20 2022

ग्वालियर। बुंदेलखंड में अतीत काल से ही आजादी की रक्षा के लिए वीर योद्धाओं और वीरांगनाओं की परंपरा रही है। उन योद्धाओं- वीरांगना ने बलिदान देकर अपने रक्त से बुंदेली आंचल को सींचा है, जिनमें से कई के नाम तो विश्व प्रख्यात हो चुके हैं। जो प्रमुख थे लेकिन उनका क्या जिन्होंने निस्वार्थ भाव से मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना बलिदान दिया। 1857 की क्रांति से पहले जो बुंदेला विद्रोह हुआ था उन क्रांतिकारियों को कोई नहीं जानता, यहां तक कि बुंदेलखंड के कई लोग भी इनसे परिचित नहीं है। बुंदेला विद्रोह में भाग लेने वाले प्रमुख क्रांतिकारी हमीरपुर के दीवान शत्रुघ्न, पंडित पपरमानंद, स्वामी ब्रह्मानंद, राम गोपाल गुप्ता, बांदा के लक्ष्मीनारायण अग्निहोत्री, पंडित रुद्रदेव शर्मा, कालूराम वैद्य, गोपीनाथ दनादन आदि प्रमुख है। बुंदेली आन-बान शान के लिए स्वयं को न्योछावर किया। आपने बुंदेलखंड के गौरव पर कभी आंच नहीं आने दी, बुंदेला विद्रोह में बढ़ चढ़कर भाग लिया और हंसते-हंसते बलिदान की बेडिय़ों पर चढ़ गए। आज उन सभी क्रांतिकारियों को याद करते हुए उनके बलिदान पर बुंदेला विद्रोह नाम से नाटक लिखा गया जो बुंदेलखंड के बलिदानों पर आधारित है।