पंचकल्याणक महोत्सव के अंतिम दिन भगवान आदिनाथ को मिला मोक्ष, निकाली शोभायात्रा

May 11 2022

ग्वालियर। जैन सिध्दक्षेत्र सोनागिर चौबीस समवशरण तीर्थ अयोध्य नगरी में उच्चरणाचार्यश्री विनम्र सागर महाराज, चर्तुविद ससंघ व निदेशन मुनिश्री विज्ञसागर व मुनिश्री विनय सागर महाराज के सानिध्य में हुए पंचकल्याणक महोत्सव का बुधबार को शोभायात्रा के साथ समापन हो गया। महोत्सव के अंतिम दिन प्रभु का मोक्ष की ओर गमन हुआ। इस पूरे आयोजन में अनेक प्रतिमाओं को प्रतिष्ठित किया गया। जिन्हें सोनागिर के 25 नंबर पार्श्वनाथ मंदिर एवं 4 नबर के मंदिरों में स्थापित किया। पंचकल्याणक महोत्सव कार्यक्रम में पाषाण से भगवान बनने की प्रक्रिया हुई, जो गर्भ कल्याणक से शुरू होकर और मोक्ष कल्याणक के रूप तक हुई।
 आचार्यश्री विनम्र सागर महाराज ने मोक्ष कल्याणक पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा श्रद्धा के बिना किसी कार्य में सफलता नहीं मिल सकती है श्रद्धा सफलता की नीव है। मोक्ष महल की सीढ़ी है, पुण्य आत्मा की भाग्य से भगवान का उपदेश होता है और नगर नगर में बिहार होता है। आचार्यश्री ने कहा कि मानव जीवन का अंतिम लक्ष्य मोक्ष प्राप्ति का होना चाहिए. मोक्ष और स्वर्ग है या नहीं इस पर कभी संदेह नहीं करना चाहिए क्योंकि दिन है तो रात है सुख है तो दुख है. स्त्री है तो पुरुष हैं पुण्य तो पाप है इसी प्रकार संसार है तो मोक्ष है स्वर्ग है तो नर्क है क्योंकि हर चीज का जोड़ा होता है. प्रतिदिन तीन संसारी आत्माएं मोक्ष जाती है. यह क्रम अनादि काल से चल रहा है फिर भी संसार कभी खाली नहीं होता है.।
आयोजन महोत्सव के प्रवक्ता सचिन जैन आदर्श कलम ने बताया कि पंचकल्याणक महोत्सव के अन्तिम दिन भगवान आदिनाथ को मोक्ष प्राप्ति के उपरांत शोभायात्रा निकाली गई जिसमे इंद्रा ने सिर पर प्रतिमाओं को लेकर चल रहे थे। शोभायात्रा में हाथी, बग्गिया, बैंड के साथ  मुनिश्री विनय सागर महाराज ससंघ एवं महिलाएं भजन गाती हुई चल रही थी। बैड के भजनो पर बालक और बालिकाए नृत्य करते हुए चल रही थे! शोभायात्रा 25 नंबर पार्श्वनाथ मंदिर व 4 नंबर मंदिर में पहुँची। यहाँ मुनिश्री विनय सागर महाराज ने प्रतिमाओं का अभिषेक कराया। धार्मिक क्रियाओं के प्रतिमाओं को वेदी में विजमान किया।
पंचकल्याणक महोत्सव मे प्रात: की बेला में जैसे ही आदिनाथ को कैलाश पर्वत से निर्वाण के साथ मोक्ष हुआ। वही आचार्यश्री विनम्र सागर महाराज ससंघ सानिध्य मे भगवान जिनेंद्र की शांतिधारा की गई। प्रतिष्ठाचार्य पं.सुरेंद्र कुमार जैन एवं सह प्रतिष्ठाचार्य पं. श्री विजय जैन, संजय शास्त्री मुरैना ने मंत्रउच्चरण के साथ यज्ञनायक मनीष मीना जैन, सौधर्म इन्द्र आकाश दीप्ति जैन, कुबेर दीपक निशा जैन, महा यज्ञनायक राजेन्द्र मीना, ईशान इंद्रा राहुल रितिका सहित इंद्र-इंद्राणियो ने विश्वशांति महायज्ञ में अग्नि प्रकाट कर पूरे विश्वशांति की यज्ञ कुडं मे आहूति देकर विश्व की कामना करते हुए पूर्णाहूति दी गई!