संतान माँ का चयन करती है माँ संतान का नही-आचार्यश्री
May 07 2022
ग्वालियर। माँ संतान का चयन नही करती संतान माँ का चयन करता है। मुझे किसकी कोख में जन्म लेना है। तीर्थंकर भगवान उसी माँ का चयन करते है जो संस्कारदात्री हो सौभाग्यशाली हो। कहा है साधारण माता तो सैकड़ो, हजारों पुत्रो को जन्म देती है पर तीर्थंकर जैसी माता विरले पुत्रों को ही जन्म देती है। ऐसा पुत्र जो तीर्थ प्रवर्सन करने वाला होता है। तीनो लोक के जीव जिन्हें नमन करते है। जन्म से ही 10 अतिशय प्राप्त होते है। यह विचार उच्चरणाचार्य विनम्र सागर महाराज ने सोनागिर 24 समवशरण भक्तिपूजा तीर्थ में आयोजित पंचकल्याणक महोत्सव के तीसरे दिन शनिवार धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
आचार्यश्री ने कहा कि माता बच्चो को संस्कार देती है। सबसे पहले देखकर, सुनकर, पढ़कर, समझकर, संस्कार आते है, लेकिन जो माता गर्भकाल में ही बच्चो स्वाध्याय, सामायिक, जिनादर्शन आदि के संस्कार देती है। धर्म की प्रभावन ही सबसे बड़ी प्रभावन है। संत साधना करता है प्रभावन हो जाती है।
पंचकल्याणक में महाराजा नाभिराय का राज दरबार सज्जा
रात में अयोध्या नगरी में इंद्रा सभा लगाई गई। महाराजा नाभिराय का दरबार सजाया गया। वहां माता मरुदेवी ने आकर महाराजा नाभिराय को माता द्वारा देखे गए 16 स्वप्नों का फल बताया। इसके बाद छप्पन कुमारियों ने झूमते-गाते हुए माता मरुदेवी की सेवा के साथ उपहार भेंट कर उनसे कुछ प्रश्न किए।
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