मित्रता हो तो कृष्ण-सुदामा जैसी-घनश्याम शास्त्री

May 07 2022

ग्वालियर। फालका बाजार स्थित राम मंदिर परिसर में आयोजित भगवत कथा में सुदामा चरित्र का वर्णन किए जाने पर श्रोता भाव-विभोर हो गए। भागवताचार्य पं.घनश्याम शास्त्री ने सुदामा चरित्र के बारे में बताया कि मित्रता करो तो भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा जैसा। सच्चा मित्र वहीं है, जो अपने मित्र की परेशानी को समझे और बिना बताए ही मदद कर दे। परंतु आजकल स्वार्थ की मित्रता रह गई है। जब तक स्वार्थ सिद्ध नहीं होता है तब तक मित्रता रहती है। जब स्वार्थ पूरा हो जाता है, मित्रता खत्म हो जाती है। शास्त्री जी ने कहा कि एक सुदामा अपनी पत्नी के कहने पर मित्र कृष्ण से मिलने द्वारिकापुरी जाते हैं। 
जब वह महल के द्वार पर पहुंच जाते हैं। तब प्रहरियों से कृृष्ण को अपना मित्र बताते हैं और अंदर जाने की बात कहते हैं। सुदामा की यह बात सुनकर प्रहरी उपहास उड़ाते हैं और कहते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण का मित्र एक दरिद्र व्यक्ति कैसे हो सकता है। प्रहरियों की बात सुनकर सुदामा अपने मित्र से बिना मिले ही लौटने लगते हैं। तभी एक प्रहरी महल के अंदर जाकर भगवान श्रीकृष्ण को बताता है कि महल के द्वार पर एक सुदामा नाम का दरिद्र व्यक्ति खड़ा है और अपने आप को आपका मित्र बता रहा है। यह बात सुनकर भगवान कृष्ण नंगे पांव ही दौड़े चले आते हैं, और अपने मित्र को सुदामा को रोककर गले लगा लेते हैं। सुदामा कृष्ण मित्रता का प्रसंग शंकर राम मंदिर परिसर में उपस्थित सभी भक्तों क्योंकि आंखों में आशु झर झर टपकने लगे आगे शास्त्री जी ने सुखदेव विदाई मिलन 7 दिन का हमारा तुम्हारा आदि प्रसंग सुनाया।