काले गुब्बारे उड़ाकर सरकार की नीतियों का किया विरोध

May 01 2022

ग्वालियर। मजदूर दिवस पर संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ग्वालियर द्वारा फूलबाग चौराहे पर काले गुब्बारे उड़ाकर सरकार की शोषण कारी नीतियों का विरोध प्रदर्शन किया। उनकी सरकार से यही मांग है की कर्मचारी 18 से 20 साल से स्वास्थ विभाग में संविदा पर कार्य कर रहे हैं, उन्हें नियमित किया जाए एवं 5 जून 2018 की संविदा नीति को लागू किया जाए इस उपलक्ष्य पर संघ के लीज अध्यक्ष धर्मवीर शुला, सभागीय अध्यक्ष स्पोर्ट स्टाफ अध्यक्ष कोमल सिंह, एमएस खान जितेन्द्र उपाध्याय कमलेश द्विवेदी अर्पिता महेश्वरी आदि उपस्थित रहे।
सीटू कार्यालय पर किया घ्वजारोहण
मई दिवस के अवसर पर नई सड़क स्थित सीटू जिला कार्यालय पर झंडा फहराया गया। इसके साथ ही हजीरा स्थित कार्यालय पर और लोको पर रेलवे यूनियन के कार्यालय पर और ग्वालियर यूनाइटेड कॉउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन (गुट्टू) के कार्यालय पर भी मई दिवस का ध्वजारोहण किया गया। इस मौके पर सीटू नेता रामविलास गोस्वामी, किसान सभा के अखिलेश यादव, श्याम यादव सहित तमाम मजदूर नेता उपस्थित रहे।                        
क्यों मनाते हैं मजदूर दिवस
 अंतर्राष्ट्रीय मज़दूर दिवस या मई दिन मनाने की शुरूआत 1 मई 1886 से मानी जाती है। जब अमेरिका की मज़दूर यूनियनों नें काम का समय 8 घंटे से Óयादा न रखे जाने के लिए हड़ताल की थी। इस हड़ताल के दौरान शिकागो की एक मार्केट में बम धमाका हुआ था। यह बम किस ने फेंका किसी को कोई पता नहीं। इसके निष्कर्ष के तौर पर पुलिस ने मजदूरों पर गोली चला दी और सात मजदूर मारे गए थे। इस घटना के कुछ समय के बाद अमेरिका में 8 घंटे काम करने का समय निश्चित कर दिया गया था। मौजूदा समय भारत और अन्य मुल्कों में मजदूरों के 8 घंटे काम करने से संबंधित कानून लागू है। भारत में एक मई का दिवस सब से पहले चेन्नई में 1 मई 1923 को मनाना शुरू किया गया था। उस समय इस को मद्रास दिवस के तौर पर प्रामाणित कर लिया गया था। इसकी शुरूआत भारतीय मजदूर किसान पार्टी के नेता कामरेड सिंगरावेलू चेट्यार ने शुरू की थी। उन्होंने मद्रास हाईकोर्ट सामने एक बड़ा प्रदर्शन किया और एक संकल्प के पास करके यह सहमति बनाई गई कि इस दिवस को भारत में भी कामगार दिवस के तौर पर मनाया जाये और इस दिन छुट्टी का ऐलान किया जाये। भारत समेत लगभग 80 मुल्कों में यह दिवस पहली मई को मनाया जाता है। इसके पीछे तर्क है कि यह दिन अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस के तौर पर प्रामाणित हो चुका है।