मजदूर दिवस

May 01 2022

कहने के लिए तो हर दिन विशेष होता है , पर इस दुनिया मैं लगभग हर  चीज़ का महत्व है ! इन्हीं में से एक खास दिन भी है , जो की मजदूर दिवस के रूप में मनाया जाता है। वास्तविकता तो ये है की दुनियाभर के हर कोने में ,ज्यादातर लोगों को अपनी आजीविका के लिए काम करना पड़ता है।हम अपने द्वारा किए गए कार्य का श्रमिक प्राप्त होता है अर्थात अपने दिनभर के समय में किसी और के लिए कार्य कर दिए गए समय के बदले मूल्य प्राप्त करते है।यह हमारे लिए महत्व रखता है इसलिए दुनिया भर मैं मई माह की  1 तारीख को  अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस मनाया जाता है।
भारत सहित लगभग 90प्रतिशत देशों में इस दिन छुट्टी ( अवकाश ) रहता है ।इस दिन दुनियाभर में कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते है,आजकल सोशल मीडिया के ट्रेंड में होने के कारण बड़े जोर शोर से इसे शुभकामनाओं सहित दुनियाभर में मनाया जाता है।किसी भी देश की प्रगति में मजदूर वर्ग का प्रमुख स्थान होता है, किसी भी देश की तरक्की का भार मजदूर वर्ग द्वारा की गई मेहनत पर ही निर्भर करता है। इसी क्रम मैं यह मैं आपके सामने कुछ पंक्तियां प्रस्तुत करने जा रही हूं। जो की मजदूर के जीवन  की व्याख्या करती है ! 
"मजदूर हूं मजबूर नहीं"......
छोटे-छोटे सब मेरे काम
हाथों का मैंने हुनर है पाया 
करता हूं मेहनत मैं दिन-रात
तब रोजी रोटी को कमाया।।
मेरा धर्म है मेरा काम
यही है सबको संदेश मेरा।।
"मजदूर हूं मजबूर नहीं"............
 
यह पंक्तियां मैंने अपनी स्वरचित कविता से प्रस्तुत की है , इन पक्तियों के भाव से ही स्पष्ट है की मजदूर दिवस का आखिर इतना महत्व क्यों है ! आज हर कोई आराम चाहता है , उसके लिए ही वह किसी न किसी से अपने कार्य को करवाने हेतु निर्भर है , सोचिए यदि काम करने वाले न होते तो क्या होता !शायद ताजमहल का निमार्ण भी बिना मजदूर के संभव न था ।
                    मजदूर दिवस के मनाने का हमारा सिर्फ यही है मजदूरी करने वाले को समानता एवम सम्मान की दृष्टि से देखा जाए एवं उनके अधिकारों के प्रति समाज को जागरूक किया जाए की वह हमारे देश की नीव है उन्हे भी हक है की वह सम्मानित किए जाए । यदि हम सर्वे करेंगे तो पाएंगे की अधिकाश रूप से ऐसा है नहीं ! किसी मजदूर को हम उसके काम करने पर उसका श्रमिक अदा करने के साथ साथ उसे धन्यवाद या सम्मानित करे तो समाज मैं मजूरी करने वाले मजदूरों के प्रति भावनात्मक रूप से नया ही प्रारंभ होगा ।
                 वैसे देखा जाए तो कोरोना काल में महामारी की मार जिस पर पड़ी है वह मजदूर वर्ग ही है!  इस प्रकार की मार से आज हमारे देश का मजदूर बेहाल है जिसमें आर्थिक मानसिक रूप से प्रताड़ना भी सहन करनी पड़ी आखिर कार मजदूरों को राहत के लिए हमारी वर्तमान सरकार ने कई संभव प्रयास किए है ,ताकि भारत मैं बेरोजगार हो चुके मजदूरों को राहत मिले ,
परंतु वास्तविक तो यह है की सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं की सही जानकारी न होने से मजदूर वर्ग पूरी तरह लाभान्वित नही हो पाता । इसके कारण बढ़ती हुई मंहगाई और मजदूर की आर्थिक परेशानियों के बीच मजदूरों में उत्साह की कमी स्पष्ट नजर आती और इसलिए यह एक दिखावे का  कागजी रूप में सबके लिए मजबूर दिवस बन कर रह गया है ! मजदूर दिवस पर भी वास्तविक मजदूर को कोई उत्साह, छुट्टी या सम्मान कहा प्राप्त है ।
लेखक 
प्रतिभा दुबे (स्वतंत्र लेखिका)
महाराज बाड़ा ग्वालियर