शनिदेव को तिल और तेल अर्पित करने के लिए होड़ मची भक्तों में
Apr 30 2022
ग्वालियर। शनि देव के दर्शन करने और तेल और तिल का दान करने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ प्राचीन मंदिर ऐंती गांव्र में रात से लगना शुरू हो गई। पसीने से तरबतर भक्तों में भगवान शनिदेव को तिल और तेल अर्पित करने के लिए होड़ मची। शनिवार को शनि अमावस्या विशेष संयोग के साथ आई है जिससे शनि की दृष्टि से कई राशि के जातकों को मुक्ति मिलेगी तो कई राशियों पर शनिदेव अपनी कृपा कम करेंगे। भक्तों ने मंदिरों में शनि देव की शांति के लिए अनुष्ठान कराया।
ज्योतिषों के अनुसार त्रिग्रही योग में शनिवार को शनिचरी अमावस्या मनाई जा रही है। शनिचरी अमावस्या, पितृ दोष निवारण के लिए खास मानी गई है। आज मंत्रों के जाप व पूजन करने से शारीरिक व मानसिक कष्ट दूर होंगे। शनि देव की कुदृष्टि न पड़े और उनकी अच्छी दृष्टि बनी रहे इसके लिए शनिवार सुबह से शनि मंदिरों में भक्तों की कतारें लगी हैं।
शनि देव को तिल, तेल अर्पित करते हुए परिवार की खुशहाली और सुख समृद्धि की कामना की जा रही है। आज शनिवार को शनि अमावस्या पर शहर के शनि मंदिरों में सुबह 5 बजे से दर्शन करने के लिए भक्त पहुंचनाशुरू हो गए, तो वहीं ऐंति गांव स्थित प्राचीन शनि मंदिर में दर्शन करने भक्त वाहनों व ट्रेनों से पहुंचे। शहर में स्थित तारागंज शनि मंदिर में भक्तों ने पहुंचकर तिल, तेल अर्पित कर मनोकामनाएं मांगी। बहोड़ापुर व रामदास घाटी, बालाजी धाम गरगज कालोनी में शनि मंदिरों में भक्त पूजा अर्चना करते हुए खुशहाली की कामना कर रहे हैं। गोल पहाडिय़ा स्थित नवग्रह मंदिर पर भक्तों की भारी भीड़ लगी हुई है।
दर्शनों के लिए भारी भीड़
शनि मंदिरों में शनिवार सुबह से ही दर्शन करने के लिए भक्तों की भीड़ लगी और दर्शन करने के लिए इंतजार करते रहे। शनिवार को शनि मंदिरों के बाहर मुंडन करने वाले बैठे हुए हैं और मुंडन कराने के लिए लोग अपनी बारी का इंतजार करते रहे। नवग्रह मंदिरों के पास सुबह से ही मुंडन किया गया और वस्त्र छोड़कर खुशहाली की कामना की गई।
इमरती, मंगोड़े की रही मांग
शनि देव को खुश करने के लिए शनिवार सुबह से ही हलवाईयों की दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ नजर आ रही है और सबसे Óयादा मांग इमरती की हो रही है। शनिदेव के वाहन काले कुत्ते को भक्त इमरती खिलाते रहे और तेल व तिल का दान भी किया।
प्रसादी का वितरण हुआ
शनि अमावस्या पर सुबह से ही शनि मंदिरों में धार्मिक आयोजन हुए तो वहीं भक्तों द्वारा प्रसादी का वितरण किया गया। जीवाजीगंज स्थित रामदास घाटी नवग्रह मंदिर में विधि विधान के साथ अभिषेक किया गया और इसके बादप्रसादी वितरण शुरू हुआ। प्रसादी पाने के लिए भक्तों की भीड़ लगी। तारागंज स्थित प्राचीन शनि मंदिर के पास भंडारे का आयोजन किया था। भक्तों को सब्जी पूड़ी के साथ मालपुए वितरित किए गए।
30 साल बाद कुंभ में शनि आज शनि अमावस्या भी
शनिदेव मकर राशि से निकलकर तीस साल बाद कुंभ राशि में प्रवेश कर चुके हैं। आज शनिवार को शनिचरी अमावस्या भी है। आज सूर्यग्रहण भी है पर चूंकि यह भारत में दिखाई नहीं दे रहा है इसलिए सूर्यग्रहण का सूतक भारत में नहीं है। वैदिक गणना के अनुसार शनि सबसे धीमा ग्रह माना जाता है। इसे एक राशि से दूसरी राशि में जाने में ढाई साल का वक्त लगता है। इसे ही शनि की ढैय्या कहा जाता है। शनिदेव अब कुंभ राशि में पहुंच चुके हैं। इसका असर सभी राशियों पर पड़ेगा।
ज्योतिषाचार्य सीमा बिरथरे कहती हैं कि खेती किसानी और कारोबार से जुड़े लोगों के लिए यह विशेष मंगलकारी होगा। इसके साथ ही मिथुन और तुला राशि वाले जातकों पर शनि की ढैय्या खत्म होने से उन्हें राहत मिलेगी। वहीं धुन के जातकों पर चल रही साढ़े साती भी खत्म हो जाएगी। बकौली श्रीमती बिरथरे शनिदेव के कुंभस्थ गोचर होने से गेहूं-चना-लौह- इस्पात-सफेद धातुओं-रसीले फल और सब्जियों में तेजी की स्थिति रहेगी। अच्छी बारिश से किसानों का्र भला होगा। कारोबारी भी मुनाफे की ओर बढ़ेंगे। शनिवार को शनिचरी अमावस है और आज के दिन स्नान-दान का खास महत्व है।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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