रजत पदक विजेता हरदेश सिंह उर्फ धोनी का सेवार्थ पाठशाला द्वारा नागरिक अभिनंदन

Apr 24 2022

 ग्वालियर। विवेकानंद नीड्म् में संचालित सेवार्थ पाठशाला में रविवार  प्रात: सत्र में झुग्गी झोपड़ी के अध्ययनरत 100 बच्चों के बीच अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में सिल्वर मेडल जीतकर आए ग्वालियर निवासी हरदेश सिंह तथा उनके गुरु प्रशिक्षक बादल शर्मा का सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि माधव महाविद्यालय की प्राध्यापिका डॉ रंजना दीक्षित थी। कार्यक्रम की अध्यक्षता पाठशाला समूह के संरक्षक ओपी दीक्षित ने की। 
उल्लेखनीय है कि हिरदेश सिंह पुणे में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय बॉडी बिल्डिंग प्रतियोगिता में सिल्वर मेडल जीत के आए हैं इसमें लगभग उनकी श्रेणी में 20 राष्ट्रों ने भाग लिया था। मुख्य अतिथि ने अपनी आसनी से बोलते हुए बच्चों को संबोधित करते हुए बताया आप वह सब बन सकते हैं जिसका आपने निर्णय लिया है। आवश्यकता लक्ष्य को पाने की तड़प तथा सुनियोजित प्रयास है। साधन संपन्नता कभी लक्ष्य में बाधक नहीं हो सकती। आप लक्ष्य पाने के लिए निरंतर पूर्ण मनोयोग से प्रयास कीजिए सफलता कदम चूमेगी। 
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में पाठशाला के संरक्षक ओपी दीक्षित ने कहा कि पाठशाला की स्थापना का उद्देश्य सभी वर्ग के बच्चों का राष्ट्र की मुख्यधारा में समावेशन है। समावेशन किस प्रक्रिया में शिक्षा एक महत्वपूर्ण कारक है। कोरोना अवधि से प्रभावित यह  अपनी भूमिका का संजीदगी से निर्वहन नहीं कर पा रहा था। इस घटक को और मजबूती प्रदान करने के लिए समर्पित राष्ट्रप्रेम इन स्वयंसेवकों की मदद से यह राष्ट्रहित की यात्रा प्रारंभ हुई और ईश्वर कृपा से अनवरत जारी है। कार्यक्रम का संचालन पाठशाला समूह के संयोजक मेजर मनोज पांडे ने तथा आभार प्रदर्शन बैंक के वरिष्ठ पदाधिकारी सेवानिवृत्त मोहनलाल ने किया। इस अवसर पर टेस्ट में अच्छा प्रदर्शन करने वाले 20 बच्चों को शैक्षणिक सामग्री देकर के पुरस्कृत भी किया गया। अपने आवाहन में श्रीमती दीक्षित ने समाज से आग्रह किया कि पिछड़े वंचित तथा ऐसे परिवारों के बच्चे जिनके माता-पिता विभिन्न कारणों से बच्चों की शिक्षा पर ध्यान नहीं दे सकते उनके उत्थान में पाठशाला समूह प्रशंसनीय कार्य कर रहा है। ऐसे आंदोलनों में समाज की एक बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है, प्रसन्नता है कि ग्वालियर का समाज एक ऐसी संस्था की मदद कर पा रहा है इसका अभी तक अभिलेखों में रजिस्ट्रेशन भी नहीं कराया गया। परंतु अपनी निष्ठा और समर्पण तथा ईमानदारी के कारण पाठशाला समूह समाज के विश्वास को अर्जित कर सका।