मन में दूरियां बढ़ते ही परिवार रामायण से महाभारत में बदल जाता है- मुनिश्री

Apr 21 2022

ग्वालियर। भाईयों के घर अलग भले ही हो जाएं, चल जाएगा, मगर मन दूर नहीं होना चाहिए। मन की दूरियां बढ़ते ही परिवार की रामायण महाभारत में बदल जाती है। पेड़ की तरह जीवन में स्वभाव बनाएं। हवा जब चलती है तो डाली पत्ते झुकजाते हैं, मगर तना तन कर खड़ा रहता हैं। इसी प्रकार परिवार समाज को एक रखने के लिए झुकना पड़े तो झुक जाएं, मगर संस्कार, सिद्धांतों को कभी न झुकने दें। यह विचार मेडिटेशन गुरु मुनिश्री विहसंत सागर महाराज ने गुरुवार को सचिन तेंडुलकर मार्ग स्थित डीबी सिटी में धर्मसभा को संबोधित करते हुए कही। मुनिश्री विश्वसूर्य सागर महाराज ने भी संबोधित किया।
मुनिश्री ने कहा कि पानी गरम हो जाता है, मगर वह शीतलता के गुण को कभी नहीं छोड़ता है। ज्ञानी कहते हैं कि वाणी ऐसी बोलिए जिससे सामने वाले का और स्वयं का मन शीतल हो जाए। मुनिश्री ने कहा कि नपा तुला खाओ, नपा-तुला बोलो, जिससे जीवन अनमोल बन जाएगा।
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया की प्रवचन से पहले धर्मसभा का शुभांरभ संगीतकर शुभम जैन सैमी ने मंगल चरण गायकर किया। 
भौतिकता की चकाचौंध में मानव आत्मिक सुख से दूर
मुनिश्री विहसंत सागर महाराज ने कहा कि भौतिकता की चकाचौंध में व्यक्ति का आत्मिक सुख कहीं खो सा गया है। पहले व्यक्ति के पास भले ही भौतिक सुख संसाधन कम थे, लेकिन सुख और शांति थी। आज ज्यों-ज्यों भौतिक सुख-सुविधाएं बढ़ रहीं हैं, त्यों-त्यों उसकी सुख-शांति कम होती जा रही है। तनाव की प्रवृत्ति बढ़ रही है। आत्म की उन्नति से ही देश की उन्नति होती है। भौतिक सुख के पीछे लोग मानवता को भूल बैठे हैं। यह सुख क्षणभंगुर है। मानव शरीर इसलिए मिला है कि हम इस जीवन में अपने इष्ट को आत्मसात कर सकें।
मनुष्य को घमंड नहीं करना चाहिए, सिर्फ कर्म करना चाहिए
मुनिश्री विहसंत सागर महाराज ने कहा कि मनुष्य को घमंड नहीं करना चाहिए, सिर्फ कर्म करना चाहिए, क्योकि कर्म से ही व्यक्ति महान बनता है। इस संसार में दो मार्ग है। सुमार्ग एवं कुमार्ग। देवता सुमार्ग पर चलते हैं और राक्षस कुमार्ग पर। गलती हर इंसान से होती है। लेकिन भगवान सबको गलती सुधारने का मौका देते हैं, राम ने रावण को भी सुधरने का मौका दिया था। विभीषण ने रावण को बहुत समझाया, लेकिन रावण अपने घमंड के कारण नहीं सुधरा उसका पतन हो गया। इसलिए मनुष्य को घमंड नहीं करना चाहिए, क्योंकि जिसने घमंड किया उसका पतन निश्चित हैं।