देवी मंदिरों में उमड़ी भक्तों की भीड़, कई जगह हुआ कन्या भोज

Apr 09 2022

ग्वालियर। चेत्र नवरात्रि की अष्टमी पर देवी मंदिरों में दर्शन पूजन के लिए भक्तों का आना देर रात्रि से ही शुरू हो गया शनिवार को भक्तों ने दुर्गा के आठवें स्वरूप महागौरी की आराधना की। नवरात्रि के पहले दिन और अष्टमी का व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं ने घर व देवी मंदिरों पर हवन-पूजन कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
चैत्र नवरात्रि की अष्टमी तिथि पर शनिवार को देवी भक्तों ने विधि विधान से माता रानी की पूजा अर्चना की। इस दौरान माता मंदिरों में भजन कीर्तन की धूम रही। माता की पूजा अर्चना करने के लिए देवी भक्तों का मंदिरों में तांता लगा रहा। सबसे ज्यादा भक्तों की भीड़ शीतला माता मंदिर पर रही जहां देर रात से ही भक्त आना शुरू हो गए। सुबह तक हजारों की संख्या में भक्तों ने मां शीतल के दर्शन कर पूजा अर्चना की। वंही मांढरे वाली माता, नहर वाली माता, करौली, वैष्णो देवी सहित शहर के सभी माता मंदिरों पर भक्तों ने पूजा अर्चना की। साथ ही अष्टमी का पूजन करने वाले परिवारों ने कन्याओं का पूजन कर खुशहाली की कामना की और व्रत खोला। रविवार को मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाएगी। इसके साथ ही नवरात्रि का समापन होगा। मां सिद्धिदात्री महालक्ष्मी के समान कमल पर विराजमान हैं। मां के चार हाथ हैं। मां ने हाथों में शंख, गदा, कमल का फूल और च्रक धारण किया हुआ है। इस दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है
कन्या पूजन का महत्व
कन्याओं का सम्मान और पूजन से देवी मां बहुत प्रसन्न होती हैं और मनोकामनाएं पूरी करती हैं। देवी पुराण में कहा गया है कि मां को जितनी प्रसन्नता कन्या भोज से मिलती है,उनको उतनी प्रसन्नता हवन और दान से भी नहीं मिलती। धार्मिक मान्यता के अनुसार, दो से दस वर्ष की 9 कन्याओं का पूजन करना शुभ माना गया है। एक कन्या की पूजा करने से ऐश्वर्य, दो कन्याओं से भोग व मोक्ष दोनों,तीन कन्याओं के पूजन से धर्म, अर्थ व काम तथा चार कन्याओं के पूजन से राजपद मिलता है। पांच कन्याओं की पूजा करने से विद्या,छह कन्याओं की पूजा से छह प्रकार की सिद्धियां, सात कन्याओं से सौभाग्य,आठ कन्याओं के पूजन से सुख-संपदा प्राप्त होती है। नौ कन्याओं की पूजा करने करने से संसार में आपकी यश-कीर्ति बढ़ती है।