जीएनएम परीक्षा बनी मजाक, पहले ही दिन भारी अफरा-तफरी

Mar 28 2022

ग्वालियर। मप्र नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल की जीएनएम प्रथम वर्ष(सत्र 2020-21) की परीक्षाएं सोमवार से शुरू करा दी गई हैं। परीक्षा के पहले दिन प्राईवेट सेंटर्स पर अव्यवस्थाओं के चलते भारी अफरा-तफरी जैसी स्थिति रही। जिम्मेदारों ने परीक्षा को मजाक बना दिया। परीक्षा का समय सुबह 9 बजे से था, मगर नर्सेस काउंसिल द्वारा ग्वालियर सहित अंचल के सेंटर्स पर ई-मेल के जरिए 1 घंटा देरी से पेपर भेजा। इसके बाद पेपर के प्रिंट आउट निकाले, जिसमें आधे घंटे से अधिक समय लगा। तब तक हर सेंटर पर छात्र-छात्राएं पेपर का इंतजार करते रहे। पेपर बांटा तब करीब दो घंटे की देरी से परीक्षा शुरू हो पाई। बाद में छात्रों को पेपर हल करने इंतना ही अतिरिक्त समय देना पड़ा। चितौरा रोड पर बनाये सेंटर पर तो परीक्षा में कॉलेज संचालक ने अपने कॉलेज के छात्रों को वीक्षक बना दिया।
जानकरी के मुताबिक सुबह 9 बजे नर्सेस काउंसिल ने आनन-फानन में सभी सेंटर्स को पत्र भेजा, जिसमें तकनीकी कारणों से समय पर पेपर नहीं पहुंचने का उल्लेख किया। पहले ही पेपर में परीक्षा व्यवस्था गड़बड़ाने को लेकर काउंसिल के आला अफसरों पर सवाल खड़े हो गए हैं। उन्होंने सेंटर तो प्राइवेट बनाए ही। इसमें दूरी का भी कोई ध्यान नहीं ग्वालियर में तीन हजार छात्रों का सेंटर शहर से 15 किलोमीटर दूर बनाया। वहीं श्योपुर, शिवपुरी के नर्सिंग कॉलेजों का सेंटर दतिया के इंदरगढ़ में बनाया। मुरैना में भी शहर से 22 किलोमीटर दूर प्राईवेट सेंटर बनाया। सेंटर निर्धारण में मनमानी के चलते नर्सिंग परीक्षा देने के लिए हजारों की संख्या में छात्र-छात्राएं परेशान होते रहे। ऐसे भी प्राईवेट सेंटर हैं, जिनमें फर्नीचर तक नहीं है। वहां टेंट हाउस से टेबल कुर्सी मंगाई हैं और गैलरी और पोर्च में बैठक व्यवस्था की गई।
परीक्षा कराने में निजी एजेंसी फेल
जानकारी के अनुसार नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल ने इस बार जीएनएम परीक्षा कराने का काम एक निजी एजेंसी को सौंपा है। बताया गया है कि परीक्षा और रिजल्ट तैयार कराने के लिए एजेंसी को चार करोड़ का ठेका दिया है। मगर यह एजेंसी पहली ही परीक्षा कराने में फेल साबित हो गई है। पहले ही दिन सेंटर्स पर समय पर पेपर नहीं पहुंच सके। लापरवाही की वजह से नर्सिंग परीक्षार्थियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
ज्यादातर छात्र नॉन अटेडिंग सीधे पेपर देने आए
सोमवार से शुरू हुई जीएनएम प्रथम वर्ष की परीक्षा में शमिल होने वाले ज्यादातर छात्र बाहर के हैं, जो नर्सिंग कॉलेजों में नॉन अटेडिंग रहे हैं। साल भर कॉलेजों में झांके तक नहीं, क्लास नहीं ली, सीधे पेपर देने आ गए हैं। पेपर देने ही शहर में इन बाहरी छात्रों की भीड़ उमड़ी है। बताया गया है कि इन छात्रों ने मोटी रकम देकर दलालों के जरिए प्रवेश लिया है। बगैर पढ़े ही पेपर देकर ऐसे छात्र मरीजों की जान से खिलबाड़ करन का काम करेंगे। 
फोन नहीं उठे जिम्मेदार अधिकारियों के 
जीएनएम परीक्षा में भारी अव्यवस्था और निर्धारिम समय से दो घंटे बाद पेपर बांटने पर नर्सिंग छात्र संगठन के पदाधिकारियों ने हर सेंटर पर आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने नर्सेस काउंसिल अधिकारियों को फोन किए। मगर अधिकारियों ने अपने फोन उठाना बंद कर दिए। मीडिया कर्मियों के भी फोन नहीं उठाए।
वाट्सऐप पर वायरल हुआ पेपर
जीएनएम परीक्षा का आज का पेपर परीक्षा शुरू होने से पहले ही वाट्एप पर वायरल हो गया। इससे परीक्षा की गोपनीयता तो भंग हुई ही, वहीं नर्सेस काउंसिल की परीक्षा प्रभारी पर सवाल उठ खड़े हुए हैं। यह पेपर काउंसिल से आउट हुआ या किसी सेंटर से वायरल किया गया। यह जांच का विषय है। मगर परीक्षा कक्षा में बंटने से पहले ही पेपर नर्सिंग शिक्षा से जुड़े ग्रुपों पर वायरल होता रहा।