आदर्श रामलीला: केवट ने प्रभु श्रीराम को उतारा गंगा पार
Mar 16 2022
ग्वालियर। आदर्श रामलीला समिति में केवट संवाद की लीला का मंचन हुआ केवट द्वारा भगवान श्रीराम को गंगा पार कराया। सर्वप्रथम भगवान श्री राम लक्ष्मण जानकी अपने गुरु एवं अपने माता पिता की आगे लेकर वन को निकलते हैं तो दशरथ जी अपने मंत्री सुमंत को यह कह कर भेजते हैं मेरे बच्चे मेरी आज्ञा का पालन करने के लिए जंगल में जा रहे हैं तुम इनको थोड़ा सैर करा कर वापस ले आना तभी आगे आने पर सभी अयोध्यावासी रामजी के रथ को रोक लेते हैं। उधर श्रीराम गंगा तट पर पहुंचते हैं यहां पर वह सुमंत को वापस अयोध्या जाकर पिताजी की सेवा के लिए बोलते हैं और उनके जाने के बाद वे केवट के पास आते हैं और केवट को गंगा पार उतारने को बोलते हैं। तब केवट उनसे परिचय पूछते हैं जब मैं अपना परिचय राम के रूप में देते हैं तो वह सभी सोच में पड़ जाते हैं और आपस में बातें करते हैं कि यह वही राम है जिनकी पैर की धूल ने पत्थर की शिला को नारी बना दिया। केवट उनके चरण धोने की बात कहते हैं और वैसा ही करते हैं और भगवान राम के चरण धोकर जब उन्हें नाव पर बैठाते हैं अब उन्हें नारायण के दर्शन होते हैं उनके चरणों से धुले हुए जल चरणामत पाकर अपने को धन्य मानते हैं केवट द्वारा भगवान को गंगा पार कराते है तो प्रभु श्री राम उन्हें अपनी अंगूठी देते हैं केवट उसे वापस कर आग्रह करते हैं कि प्रभु आप आए मेरे द्वार मैंने उतारा गंगा पार मैं आऊंगा आपके द्वार आप मुझे करना भव से पार श्रीराम केवट को आशीर्वाद दे आगे बढ़ते हैं।
उधर अयोध्या में राजा दशरथ श्री राम लक्ष्मण जानकी का इंतजार करते हुए व्याकुल हो रहे थे। तभी उन्हें कुछ वर्ष पूर्व अपने शिकार के दौरान मात-पिता भक्त श्रवण कुमार कि वह दृश्य दिखाई दिए जो अनजाने में उनके द्वारा चलाए गए तीर से मारा गया। श्रवण कुमार के माता-पिता के श्राप को याद करते हैं। तभी वहां सुमंत खाली हाथ पहुंचते हैं जिसे देख कर राजा दशरथ के पूछने पर सुमंत बताते हैं कि राम लक्ष्मण जानकी मुझे छोड़कर जंगल पर निकल गए हैं इतना सुनते ही दशरथ अपने प्राण त्याग देते हैं तब तीनों रानी विलाप करती हैं तो गुरु वशिष्ठ उन्हें शांत कराकर भरत को ननिहाल से बुलवाने को कहते हैं।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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