हास्य नाटक मिस आलूवालिया का मंचन हुआ, दर्शकों को खूब हंसाया

Mar 14 2022

ग्वालियर। रंग सारथी एवम् एसोसिएशन ऑफ ग्वालियर यूथ सोसाइटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हास्य नाटक मिस आलूवालिया का सफल मंचन नाट्य कला मंदिर दाल बाजार में किया गया इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में दौलत सिंह डायरेक्टर आईटीएम कालेज उपस्थित थे। इस आयोजन की जानकारी देते हुए संस्था के अध्यक्ष संजय क_ल ने बताया कि इस नाटक का निर्देशन वरिष्ठ रंगकर्मी रविन्द्र जगताप ने किया है सह निर्देशन रेशु गंगवार थे।

खांदा और प्यारेलाल छात्रावासी हैं। ये दोनों, दो लड़कियों से प्रेम करते हैं लड़कियां सगी बहने हैं और लड़कियों के पिता भवतारण बाबू थोड़े लालची किस्म के इंसान हैं वे अपनी बेटियों की शादी संपन्न परिवारों में करने के इच्छुक है। बस यही बात इन बच्चों के प्रेम में बाधक है।
एक दिन अचानक प्यारेलाल की मौसी के आने का समाचार मिलता है मौसी बेहद धन संपन्न है और आलू का व्यापार करती हैं, इसलिए मिस आलूवालिया के नाम से जानी जाती हैं। मौसी प्यारेलाल की परीक्षा लेने के लिए अपने ना आने का झूठा टेलीग्राम भेजती हैं। मौसी के न आने की खबर से खांदा और प्यारेलाल परेशान हो जाते हैं। वह अपने मित्र पटलापाशा को किसी तरह मौसी बनने के लिए राजी कर लेते हैं। खांदा के चाचा जीवन बाबू और भवतारण बाबू दोनों ही मौसी बने पटलापाशा पर मुग्ध हो जाते हैं, क्योंकि दोनों के मन में कहीं ना कहीं पैसे का लालच  होता है। पटलापाशा एक लड़की पुष्पिता को प्रेम करता है। मौसी के साथ पुष्पिता भी उसी घर में आ जाती है। खांदा, प्यारे लाल, मीणा, शैल पटलापाशा पुष्पिता तीनों युवा प्रेमी युगल अजीब परिस्थितियों में फंस जाते हैं, जो नाटक में हास्य की परिस्थितियां बेहद सहजता से उत्पन्न करते हैं।
जीवन बाबू और मौसी( विशालाक्षी) जवानी में बिछुड़े प्रेमी है जो यहां आकर दोबारा मिलते हैं। पटलापाशा परेशान हैं कि स्त्री रूप के कारण भवतारण बाबू उससे शादी करना चाहते हैं और इसी रूप के कारण उसकी प्रेयसी उसे पहचान नहीं पा रही है पर अंत में सब कुछ ठीक-ठाक हो जाता है। सबका परिवार बस जाता है।