किसी स्वर्ग से कम नहीं है अपनों के सताए हुए लोगों के लिए माधव बाल निकेतन एवं वृद्धा आश्रम -घनश्याम शास्त्री

Mar 03 2022

 ग्वालियर । माधव बाल निकेतन एवं वृद्धाश्रम में चल रही श्रीमद् भागवत कथा सप्ताह के तीसरे दिन गुरुवार को सुप्रसिद्ध भागवताचार्य पं.श्री घनश्याम शास्त्री जी महाराज ने कहा कि मनुष्य जीवन में जाने अनजाने प्रतिदिन कई पाप होते है उनका ईश्वर के समक्ष प्रायश्चित करना ही एक मात्र मुक्ति पाने का उपाय है। भागवताचार्य जी ने बताया कि किसी स्वर्ग से कम नहीं है अपनों के सताए लोगों के लिए माधव बाल निकेतन एवं वृद्ध आश्रम। मनुष्यों का क्या कर्तव्य है इसका बोध भागवत सुनकर ही होता है विडंबना ये है कि मृत्यु निश्चित होने के बाद भी हम उसे स्वीकार नहीं करते हैं निस्काम भाव से प्रभु का स्मरण करने वाले लोग अपना जन्म और मरण दोनों सुधार लेते हैं। प्रभु जब अवतार लेते हैं तो माया के साथ आते हैं साधारण मनुष्य माया को शाश्वत मान लेता है और अपने शरीर को प्रधान मान लेता है जबकि शरीर नश्वर है । उन्होंने कहा कि भागवत बताती है कि कर्म ऐसा करो जो निस्काम हो वहीं सच्ची भक्ति है जीवन में सत्संग व शास्त्रों में बताए आदर्शों का श्रवण करने का आह्वान करते हुए कहा कि सत्संग में वह शक्ति है,जो व्यक्ति के जीवन को बदल देती है व्यक्तियों को अपने जीवन में क्रोध, लोभ, मोह, हिंसा, संग्रह आदि का त्यागकर विवेक के साथ श्रेष्ठ कर्म करने चाहिए,भगवान के नाम मात्र से ही व्यक्ति भवसागर से पार उतर जाता है उन्होंने भगवत कीर्तन करने, ज्ञानी पुरुषों के साथ सत्संग कर ज्ञान प्राप्त करने व अपने जीवन को सार्थक करने का आह्वान किया,भागवत कथा के श्रवण मात्र से ही मनुष्य को वैभव और पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है जो सच्चे मन से भगवान को याद करता है भगवान स्वयं प्रकट हो कर उनकी रक्षा करते हैं कथा के पूर्व भागवत भगवान की आरती वृद्धाश्रम के चेयरमैन नूतन श्रीवास्तव सचिव श्याम श्रीवास्तव सह सचिव मनोज दुबे संस्था अधीक्षिका सीमा सक्सेना ने आरती कर कथा श्रवण की। भागवताचार्य ने बताया सुनीति महाराज उत्तानपाद की रानी थीं जिनके गर्भ से ध्रुव जैसे तेजस्वी बालक ने जन्म लिया था महाराज उत्तानपाद की दो रानियाँ थीं सुनीति और सुरुचि उत्तानपाद के सुनीति से ध्रुव तथा सुरुचि से उत्तम नामक पुत्र उत्पन्न हुये थे यद्यपि सुनीति बड़ी रानी थीं किन्तु राजा उत्तानपाद का प्रेम सुरुचि के प्रति अधिक था ध्रुव अपने घर से तपस्या के लिए जा रहे थे रास्ते में उन्हें देवर्षि नारद मिले उन्होंने ध्रुव को"ॐ नमो भगवते वासुदेवाय"का जाप कर के भगवान विष्णु की तपस्या करने को कहा ध्रुव ने नारद जी की बात मानकर एक पैर पर खड़े होकर छह माह तक कठोर तप किया बालक की तपस्या देख भगवान विष्णु ने दर्शन देकर उसे उच्चतम पद प्राप्त करने का वरदान दिया इस अवसर पर परीक्षित पवन भटनागर श्रीमती लक्ष्मी विजय भटनागर कथा श्रवण की।
मुख्य अतिथि के रूप में जगतगुरु आनंदेशवर जी महाराज महाराज वरिष्ठ पत्रकार सुरेश सम्राट जी अशोक जादौन जी जिला उपाध्यक्ष भारतीय जनता पार्टी मनोज मुटाटकर मंडल अध्यक्ष संजय धुपर जी  बैशाली धुपर जी पी डी सोनी ममता भीलवार प्रदेश मंत्री महिला मोर्चा मोहन भीलवार आशीष श्रीवास्तव बैंक कॉलोनी सुरेंद्र श्रीवास्तव सहित संस्था के चेयरमैन नूतन श्रीवास्तव उपाध्यक्ष इंदिरा मंगल सचिव श्याम श्रीवास्तव सह सचिव मनोज दुबे कोषाध्यक्ष अनूप श्रीवास्तव संस्था दीक्षिका सीमा सक्सेना दीपक श्रीवास्तव अंकुर श्रीवास्तव आशीष श्रीवास्तव अरुण सक्सेना पुष्पा तिवारी उमा शर्मा रूबी शर्मा सलोनी अंशुल सहित कई श्रद्धालु गण मौजूद रहे।