जिसे मृत बताया वो निकली जिंदा, 18 घंटे बाद फिर हुई मौत, लापरवाही की जांच शुरू

Feb 26 2022

ग्वालियर। अंचल के सबसे बड़े अस्पताल जेएएच (जयारोग्य हॉस्पिटल) के डॉक्टर भी गजब हैं। यहां एक महिला की 18 घंटे में दो बार मौत हुई है। डॉक्टरों ने एक जिंदा महिला को मृत घोषित कर शव को डेड हाउस पहुंचा दिया। पोस्टमार्टम में महिला के सीने पर हाथ रखते ही पति को लगा कि धड़कन चल रही हैं, इस पर परिजन ने हंगामा किया। डॉक्टरों ने बिना ईसीजी किए महिला को मृत घोषित कर दिया था।
हंगामा के बाद महिला को भर्ती कर फिर से इलाज शुरू किया गया। यह घटना शुक्रवार शाम 5.30 बजे की है। इसके बाद महिला करीब 18 घंटे और जिंदा रही। शनिवार सुबह 10.30 बजे फिर से महिला की मौत हो गई। इस बार डॉक्टरों ने दो बार ईसीजी की और तीन-तीन बार पल्स चैक करने के बाद ही शव को डेड हाउस के लिए भेजा। अंचल के सबसे बड़े अस्पताल में इस तरह की लापरवाही से पूरे प्रदेश में जयारोग्य अस्पताल समूह की बेइज्जती हुई है।
यह है पूरा मामला
उप्र के महोबा निवासी निरपत सिंह राजपूत ने बताया कि दो दिन पहले उनकी पत्नी जामवती (31) का बाइक से एक्सीडेंट हो गया था। वह बाइक से गिर पड़ी थीं। जिसके बाद हरपालपुर में अस्पताल ले गए तो उसे झांसी के लिए रेफर कर दिया गया। झांसी में प्राइवेट अस्पताल में भर्ती किया तो गुरुवार को ग्वालियर के लिए रेफर कर दिया गया। यहां गुरुवार रात उन्होंने जेएएच के ट्रॉमा सेंटर पर जामवती को भर्ती कराया, लेकिन शुक्रवार को शाम 5:30 बजे के करीब ईसीजी किए बिना ही मरीज को एनेस्थीसिया के डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। मृत घोषित करने वालों में एनेस्थीसिया के डॉ. इमरान व ट्रॉमा में उस समय इंचार्ज डॉ.किशन थे। जब परिजन जामवती को स्ट्रेचर पर लेकर डेड हाउस पहुंचे और वहां उसे मृत समझकर फ्रीजर में रखवा रहे थे तभी पति का हाथ पत्नी के सीने पर लगा तो उसे उसकी धड़कन चलती मिली। इसके बाद उन्होंने नाक के पास हाथ लगाकर देखा तो सांसे चल रही थीं। परिजन ने हंगामा खड़ा कर दिया और वापस जामवती को अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां डॉक्टरों ने तत्काल अपनी गलती मानकर महिला का इलाज शुरू कर दिया।
घटना के 18 घंटे बाद टूटी जिंदगी की डोर
जामवती को मृत घोषित करने के बाद फिर से अस्पताल में भर्ती कर इलाज शुरू किया गया। हकीकत में वह जिंदा थी। इसके बाद करीब 18 घंटे तक महिला जिंदगी और मौत के बीच जूझती रही। शनिवार सुबह 10.30 जामवती ने आखिरकर दम तोड़ दिया। इस बार उसकी मौत की घोषणा करने से पहले डॉक्टर काफी घबराए हुए थे। पहले दो बार ईसीजी किया फिर पल्स चैक की तब जाकर उसकी मौत की पुष्टि की गई। परिजन की निगरानी में शव पोस्टमार्टम के लिए डेड हाउस में पहुंचाया गया है।
मृतका का पति निरपत सिंह का कहना है कि शुक्रवार दोपहर 4 बजे से ही डॉक्टरों ने इलाज बंद कर दिया था। 5.30 बजे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद जब सांस चलते देखी तो वहां ले गए। फिर उन्होंने इलाज शुरू कर दिया। इसके 18 घंटे बाद उसने फिर दम तोड़ा है। डॉक्टरों की लापरवाही, मृत मानकर इलाज बंद कर देना गंभीर लापरवाही है। शुक्रवार दोपहर 4 बजे से शाम 7 बजे तक जामवती का कोई इलाज नहीं हुआ। यदि इलाज मिलता रहता तो शायद अभी वो जिंदा होती। निरपत ने बताया कि उसके दो बच्चे हैं एक की उम्र 8 साल है और दूसरे की 15 साल, पत्नी की मौत के बाद उनका क्या होगा।
इस मामले में जेएएच अधीक्षक डॉ. आरकेएस धाकड़ का कहना है कि यह गंभीर लापरवाही है। मौत की घोषणा करने से पहले वहां मौजूद डॉक्टरों को ईसीजी करना था, लेकिन यह नहीं किया गया। पूरे मामले की जांच के लिए टीम बना दी है। जल्द जांच कर मामले में लापरवाही बरतने वाले डॉक्टरों के खिलाफ एक्शन लिया जाएगा। अभी डॉक्टर को हटाने के लिए कह दिया है।