विश्व कल्याण के साथ धर्म स्थापना के लिए हुआ श्रीकृष्ण का प्राकट्य-रामप्रसाद

Feb 20 2022

ग्वालियर। जब-जब धरती पर धर्म की हानि होती है, अधर्म की वृद्धि होती है, साधु और सज्जनों को कष्ट होता है, पापीयों का अत्याचार बढ़ता है  तब अपने भक्तों को कल्याण के लिए उनकी रक्षा के लिए भगवान अवतार लेते हैं। श्रीकृष्ण ने भी जन्म लेकर धरती को कंस एवं दुर्योधन जैसे पापीयों के बोझ से मुक्त करवाकर धर्म की स्थापना की। उक्त विचार बड़ोदा से पधारे संत रामप्रसादजी महाराज ने लक्ष्मीगंज स्थित रामद्वारा में चल रहे। 7 दिवसीय श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान महायज्ञ में चतुर्थ दिन रविवार को श्रीकृष्ण जन्म का प्रसंग सुनाते हुए व्यक्त किये। 
भागवत सप्ताह में चतुर्थ दिन कथा के प्रसंग को आगे बढ़ाते हुए संतश्री ने कहा कि जिस घर में नारी की पूजा होती है, नारी का सम्मान होता है वहां देवता वास करते हैं, इसीलिए शास्त्रों में भी कहा गया है कि यत्र नार्यस्तु पूज्यंते रमंते तत्र देवता। जिस घर में जिस परिवार में जिस समाज में जिस राष्ट्र में नारी को प्रताडि़त किया जाता है वह नष्ट हो जाता है, जैसे कंस के द्वारा अपनी बहन देवकी को प्रताडि़त किया गया और उसकी सात निरपराध संतानों को  मारा गया तो उन्हीं माता देवकी से भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य हुआ, जिन्होंने कंस का वध कर धरती को उसके अत्याचारों से मुक्त कराया।  रावण ने सीता का हरण किया उसका सर्वनाश हो गया, दुर्योधन ने द्रौपदी का अपमान किया उसका कुलनाश हो गया। दूसरी ओर नारी को भी अपनी मर्यादाओं में रहकर कार्य करना चाहिए तभी वह सम्मान की पात्र होगी।
रामद्वारा में कृष्ण जन्म बड़े धूमधाम के साथ उत्सव के रूप में मनाया गया। पूरे रामद्वारे को गोकुल की तरह से सजाया गया था। संतजी द्वारा कृष्ण जन्म के पूर्व गाये गए भजन-स्वागतम कृष्णा सुस्वागतम कृष्णा-पर श्रोता भाव विभोर होकर हाथ जोड़कर श्रीकृष्ण के आगमन की प्रतीक्षा करने लगे। टोकरी में बालगोपाल को रखकर वासुदेव ने जैसे ही पंडाल में प्रवेश किया और संतश्री के ये कहते ही कि बधाई हो लाला भयो है। "नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की" के उदघोष से  पंडाल गुंजायमान हो गया, पीले वस्त्रों में श्रद्धालु नाचने लगे, बधाइयां लुटाने लगे, पुष्पवर्षा करने लगे।
तत्पश्चात कथा के मुख्य यजमान श्रीमती सीमा कुलकर्णी एवं पी कुलकर्णी, मुरैना विधायक राकेश मावई, पूर्व साडा अध्यक्ष जयसिंह कुशवाह आदि श्रद्धालुओं ने श्रीमद्भागवत की आरती उतारी।