डॉ. वंदना सेन की दो पुस्तकों का हुआ विमोचन.दलित विमर्श को समरसता विमर्श में बदलें : दवे
Feb 11 2022
ग्वालियर, नसं। आजकल विमर्श के नाम पर समाज और परिवार को बांटा जा रहा है। भारतीय साहित्य भी विमर्श में उलझता जा रहा है। दलित विमर्श को समरसता विमर्श में बदलने की जरूरत है। इससे भारतीय आत्मा और चेतना अपने आप प्रगट होने लगेगी। साथ ही विमर्श के नाम पर समाज में जो जहर फैल रहा है, वह अपने आप बंद हो जाएगा। यह बात मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी के निदेशक डॉ. विकास दवे ने राष्ट्रोत्थान न्यास के विवेकानंद सभागार में आयोजित डॉ. वंदना सेन की दो पुस्तकों के विमोचन समारोह में कहीमप्र साहित्य अकादमी के सहयोग से प्रकाशित डॉ. वन्दना सेन की पुस्तक आलेख संग्रह उदात्त चेतना और काव्य संग्रह एक नया प्रकाश के विमोचन समारोह के मुख्य वक्ता श्री दवे ने कहा कि स्त्री विमर्श के नाम पर भी समाज को दो फाड़ किया जा रहा है। उन्होंने वीरांगना लक्ष्मीबाई का उदाहरण देते हुए कहा कि जो महिला अपनी पीठ पर बच्चे को बांधकर यहां अंग्रेजों से युद्ध कर सकती है और लोपामुद्रा जैसी महिलाओं ने वेदों में ऋचाएं लिखी हैं तो फिर स्त्री विमर्श की जरूरत कहां से पड़ गई। मेरा मानना है कि स्त्री विमर्श को परिवार विमर्श में बदलना चाहिएबॉक्ससाहित्य अकादमी युवा साहित्यकारों की 75 पुस्तकें प्रकाशित करेगीमप्र साहित्य अकादमी के निदेशक डॉ. दवे ने कहा कि आजकल की युवा पीढ़ी अच्छा लेखन कर रही है। अच्छे सृजन और भविष्य के पाठकों के लिए साहित्य अकादमी युवा साहित्यकारों को प्रोत्साहित करेगी। अमृत महोत्सव के तहत 37.50 लाख रुपए से 75 युवा साहित्यकारों की पुस्तकें प्रकाशित की जाएंगी। उनकी रचनाओं के लिए 50 प्रतिशत छात्रवृत्ति भी उन्हें दी जाएगी। उन्होंने पीजीव्ही महाविद्यालय की प्राध्यापक डॉ. वंदना सेन को भारतीय संस्कृति को केंद्र में रखकर पुस्तकें लिखने के लिए उन्हें हार्दिक बधाई देते हुए निरंतर इस पथ पर आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि आगामी समय में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और वीरेंद्र मिश्र जैसे अनेक साहित्यकारों की स्मृति में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।बॉक्सदृष्टि और मानदंड तय करने से मिलती है सफलतामुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार एवं पत्रकार डॉ. सुरेश सम्राट ने कहा कि किसी भी क्षेत्र में दृष्टि और मानदंड तय करने से सफलता मिलती है। डॉ. वंदना सेन की दोनों पुस्तकों में राष्ट्रीय भाव का संचेतन तो है ही साथ ही वह समाज को सही दिशा का बोध भी कराती हैं। उन्होंने कहा कि ग्वालियर में हिंदी साहित्य अकादमी ने युवा साहित्यकारों को निखारने का काम किया हैबॉक्सअच्छी पुस्तकें आज भी पढ़ी जाती हैंप्रेमचंद सृजन पीठ मध्यप्रदेश के पूर्व निदेशक जगदीश तोमर ने अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए कहा कि यह सही बात है कि आजकल लोगों में पढ़ने की रुचि कम हुई है, लेकिन अच्छी पुस्तकें आज भी पढ़ी जाती हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय साहित्य पुरातन काल से समृद्ध रहा है और इसे आगे बढ़ाने का काम अब युवा साहित्यकारों का जारी रखना चाहिए। सारस्वत अतिथि पीजीव्ही महाविद्यालय ग्वालियर के प्राचार्य डॉ. विजय कुमार गुप्ता ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि डॉ. वंदना सेन ने भारतीय संस्कृति को केंद्र में रखकर दो पुस्तकें लिखकर हमारे महाविद्यालय का नाम रोशन किया है। कार्यक्रम का संचालन राजेश वाधवानी एवं आभार प्रदर्शन ज्योति दोहरे ने किया। इस मौके पर प्रमुख रूप से स्वदेश के समूह संपादक अतुल तारे, स्थानीय संपादक दिनेश राव, वरिष्ठ साहित्यकार तेजनारायण बैचेन, डॉ. कुमार संजीव, राजकिशोर वाजपेयी,डॉ. कमल जैन, डॉ. सुनील पाठक, दिनेश चाकणकर, सुनीता पाठक, जवाहर प्रजापति, व्याप्ति उमड़ेकर, जान्हवी नाईक उपस्थित रहे
संपादक
Rajesh Jaiswal
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