पहले दिन 20 प्रतिशत बच्चे ही स्कूल पहुंचे,अभिभावकों में अभी भी डर

Feb 01 2022

ग्वालियर। कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर के बीच एक बार फिर 50 प्रतिशत क्षमता के साथ स्कूल खुले हैं। मंगलवार (1 फरवरी) से स्कूल खुले तो लेकिन सिर्फ 15 से 20 फीसदी बच्चे ही स्कूल पहुंचे हैं। इनमें से भी 10वीं से 12वीं के बच्चे ज्यादा थे और उनसे भी ऐसे छात्रों की संख्या अधिक थी जिनको वैक्सीन लगवानी थी। दरअसल, कोरोना के चलते बच्चों को स्कूल भेजने को लेकर अभिभावकों में असमंजस है।
ऐसे में परिजन ही बच्चों को स्कूल नहीं भेज रहे। कई जगह स्कूलों में शिक्षक दो-चार-छह बच्चों को घेरकर बैठे हुए थे। स्कूल का पहला दिन क्लास में कोरोना और तीसरी लहर की चर्चा में ही गुजरा है। सीधे शब्दों में कहें तो स्कूल तो खुल गए हैं, लेकिन अभी अभिभावकों में सरकार वो विश्वास पैदा नहीं कर पाई है कि वह अपने बच्चों को स्कूल भेजें।
गेट से ही मास्क, सैनिटाइजर पर टोका, मास्क भी दिए
शिंदे की छावनी स्थित शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में गेट पर ही बच्चों को मास्क, सैनिटाइजर के लिए रोका टोका जा रहा था। जिन छात्राओं के पास मास्क नहीं थे उनको स्कूल प्रबंधन ने ही मास्क वितरित किए। स्कूल प्रबंधन ने बताया कि 5 लोगों के स्टाफ की ड्यूटी मास्क, सैनिटाइजर व टीनएजर्स वैक्सीनेशन में लगा दी है। दो दिन पहले ही 50 प्रतिशत क्षमता के साथ स्कूल खुलने के मैसेज छात्राओं के संबंधित मोबाइल नंबर पर भेजे गए थे। जिसके बाद उपस्थिति काफी कम रही है। 15 से 20 फीसदी छात्राएं ही स्कूल में आई हैं। पहली से पांचवी तक के बच्चे तो 5 प्रतिशत ही आए हैं। बड़ी क्लास के जो बच्चे स्कूल आए वह भी वैक्सीनेशन के लिए आए हैं।
ग्वालियर के कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में छात्राएं पहुंची तो थी, लेकिन ऑफलाइन पढ़ाई को लेकर गफलत का माहौल रहा। स्कूल टाइम सिर्फ कोरोना संक्रमण और तीसरी लहर पर चर्चा में ही गुजर गया। क्लास में टीचर से लेकर स्टूडेंट्स तक कोरोना पर ही बात करते हुए नजर आए। टीचर्स भी क्लास में छात्राओं को कोरोना से बचाव के तरीके और मास्क, सैनिटाइजर व सोशल डिस्टेंस का पालन कराने पर जोर देते नजर आए।
ऑनलाइन-ऑफलाइन क्लास में उलझे छात्र
मंगलवार मतलब 1 फरवरी से कोरोना की तीसरी लहर के बीच प्रदेश सरकार ने स्कूल खोल दिए हैं। ग्वालियर के निजी स्कूल और शासकीय स्कूल में कम ही संख्या में छात्र पहुंचे हैं। पर जो छात्र पहुंचे हैं सभी अजीब दुविधा में है। कोविड के चलते ऑनलाइन क्लासेस चल रही हैं। पर स्कूल खुलने पर ऑफलाइन क्लासेस को लेकर छात्र गफलत में हैं। छात्रों का कहना है कि स्कूल खुल भी जाएं तो भी इस सेशन में ऑनलाइन क्लासेस ही चलती रहनी चाहिए।
स्कूल तो खुल गए हैं, लेकिन छात्रों की संख्या बता रही है कि कोरोना की तीसरी लहर के बीच बच्चों को स्कूल भेजने के लिए अभी भी अभिभावक सहमत नहीं है। इसलिए इसका असर स्कूल के पहले दिन छात्रों की संख्या पर भी नजर आया है। शासकीय कन्या विद्यालय शिंदे की छावनी प्रभारी प्राचार्य शिंदु श्रीवास्तव ने बताया कि 50 प्रतिशत बच्चों को सूचना दी थी, लेकिन काफी कम संख्या में बच्चे आए हैं। अभी भी अभिभावकों को स्कूल भेजने को लेकर डर है।