बेटी से बिछडऩे के दुख में हुई बीमार, बेटी के जन्मदिन पर ली आखिरी सांस, हुई मौत- सोमवार को कोविड से हुई थी 33 वर्षीय नम्रता की मौत

Jan 25 2022

ग्वालियर। सोमवार को 33 वर्षीय नम्रता जैन ने कोरोना संक्रमण के आगे दम तोड़ दिया। महिला को कैंसर था और फेफड़ों में पानी भरने के कारण हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। दो दिन पहले उसे रैपिड एंटीजन टेस्ट में संक्रमित पाया गया था। महिला अपनी इकलौती गोद ली हुई बेटी से बिछडऩे के गम में डिप्रेशन में थी। इसे इत्तेफाक ही कहेंगे 24 जनवरी को जब महिला ने दम तोड़ा उसकी बेटी का जन्मदिन था। नम्रता की मौत से जैन परिवार गहरे शोक में डूब गया है। मृतका ने बच्चे न होने पर अपनी बहन की 24 दिन की बेटी को गोद लिया था, डेढ़ साल उसे अपने पास भी रखा, लेकिन अचानक दिसंबर 2021 को बहन आई और बेटी के अपहरण का आरोप लगाकर अपनी बेटी को वापस ले गई थी। तभी से नम्रता गहरे तनाव में थी। संभवत: उसे ह्दयघात हुआ होगा। हालांकि कोविड रिपोर्ट में पाजिटिव बताया था इसलिए उसका अंतिम संस्कार कोविड प्रोटोकाल के तहत लक्ष्मीगंज मुक्तिधाम में किया गया।
मुंहबोली बहन की बेटी ली थी गोद
शशिकांत का कहना है कि बडौदा की रहने वाली मुंहबोली बहन अंजली पत्नी विवेक कुमार से लंबे अर्से बाद सहारनपुर में एक जैन समाज के कार्यक्रम में मुलाकात हुई थी। तब अंजली को दो बेटी थी और तीसरी बेटी उसके गर्भ में थी। मुझे कोई संतान नहीं थी जिसके बारे में मैंने बातों बातों में अंजली को बताया और मैंने यह भी बता दिया कि वह जल्द ही कोई बच्चा गोद लेने वाले हैं। जिसके बाद अंजली ने प्रस्ताव रखा कि उसके पास दो बेटियां पहले से ही तीसरी बेटी गर्भ में आप पैदा होने पर उसे गोद ले लें। 
मुंहबोली बहन थी इसलिए मैंने और नम्रता ने सहमति जता दी। 100 रुपये के स्टांप पेपर पर लिखापढ़ी कर 24 दिन की बच्ची दो साल पहले गोद ले ली। बच्ची का पहला जन्म दिन धूमधाम से मनाया और बच्ची के आने से नम्रता की झोली में खुशियां लौट आई थीं। लेकिन जब बच्ची डेढ़ साल की हुई तो मुंह बोली बहन बच्ची को वापस मांगने लगी और उसने अपहरण का आरोप लगाते हुए कोर्ट में केस कर दिया। 8 दिसंबर 2021 को अंजली पुलिस के साथ आई और जबरन बच्ची को ले गई। उसके बाद नम्रता टूट गई और बीमार रहने लगी। बच्ची का आज जन्म दिन है और उसी की याद में उसकी जान चली गई।
नम्रता खुद भी गोद ली हुई थी इसलिए समझती थी दर्द
शशिकांत ने बताया कि नम्रता मूल रूप से भिंड के रहने वाले व्यापारी कमल जैन की बेटी थी। कमल के बड़े भाई अशोक की अपनी कोई संतान नहीं थी तो उन्होंने नम्रता को गोद लिया था। नम्रता के असली पिता से उसके ताऊ ने इसी तरह 100 रुपए के स्टांप पर कार्रवाई कर गोद लिया था। उसके बाद नम्रता के पालन पोषण से लेकर कन्यादान तक की जिम्मेदारी अशोक कुमार जैन ने निभाई थी। खुद भी गोद ली गई थी इस लिए उसे पता था कि गोद लिए बच्चे का दर्द क्या होता है।