मां-बहन और बेटी को आज भी वो स्थान नहीं मिला जिसकी वो हकदार-शिवराज

Jan 25 2022

ग्वालियर। राष्ट्रीय बालिका दिवस पर जीवाजी विश्वविद्यालय के अटल सभागार में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने कहा है कि बेटियों के नाम सिर्फ एक ही दिन क्यों, इनके नाम तो हर दिन और पल होने चाहिए। आज भी मां-बहन और बेटियों को वो स्थान या सम्मान नहीं मिला है जिसकी वो हकदार हैं। लोगों की सोच बदल रही है, लेकिन अभी तक पूरी सोच नहीं बदली है। आज भी लाड़ली लक्ष्मी के जन्म पर वो खुशियां नहीं मनाई जाती हैं। प्रदेश सरकार लगातार बेटियों को लिए काम रही है। मुख्यमंत्री चौहान ने कार्यक्रम में बोलने के लिए जा ही रहे थे कि तभी एक बच्ची के रोने की आवाज आई। क्योंकि वहां कई महिलाओं को लाड़ली लक्ष्मी योजना के तहत दिए जाने वाले सार्टिफिकेट देने बुलाया गया था। मां के साथ उनकी छोटी-छोटी बच्चियां भी थीं। बच्ची के रोने की आवाज सुनकर सीएम चौहान ने खुद को रोका और कहा सबसे पहले इन महिलाओं को सार्टिफिकेट देंगे जिससे यह बच्चों को लेकर जा सकें। इसी दौरान उन्होंने वेदांशी नाम की बच्ची को अपनी गोद में लिया। इसके बाद महिलाओं का सम्मान करने के बाद अपनी स्पीच दी।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को मुरैना के कैलारस धाकड़ समाज के कार्यक्रम सहित विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेना था। राष्ट्रीय बालिका दिवस भी था। ऐसे में लौटकर भोपाल में कार्यक्रम करने के बदले उन्होंने ग्वालियर में ही महिलाओं और बेटियों का सम्मान करने की बात कही। सीएम के शॉर्ट नोटिस पर ग्वालियर जिला प्रशासन ने तत्काल जीवाजी विश्वविद्यालय के अटल बिहारी वाजपेयी सभागार में "सशक्त बालिका-सशक्त समाज-सशक्त मध्यप्रदेश" नाम से राज्य स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया। जिसमें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह, केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर फिजिकल और केन्द्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया वर्चुअल शामिल हुए हैं। सीएम चौहान राज्य स्तरीय कार्यक्रम में सिंगल क्लिक के जरिए प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, लाड़ली लक्ष्मी योजना के तहत प्रमाण-पत्र व छात्रवृत्ति का वितरण भी किया। महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करने वाली महिलाओं को इस अवसर पर सशक्त नारी सम्मान प्रदान किया है।
शहर में भ्रमण भी किया
कार्यक्रम के बाद सीएम शिवराज सिंह चौहान ने शहर का भ्रमण भी किया। कार्यक्रम के बाद वह बस स्टैंड रैन बसेरा पहुंचे यहां व्यवस्थाएं देखीं और फिर रेलवे ओवरब्रिज के नीचे मंशापूर्ण हनुमान मंदिर के दर्शन किए। इसके बाद चौपाटी पहुंचे हैं।