राजमाता जैसे व्यक्तित्वों के कारण भाजपा आज विश्व की सबसे बड़ी पार्टी है-सिलावट

Jan 25 2022

ग्वालियर। राजमाता विजयाराजे सिंधिया की 21 वीं पुण्यतिथि पर मंगलवार को छत्री में स्थित समाधि पर जिले के प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट, सांसद विवेक नारायण शेजवलकर, कमल माखीजानी, पूर्व मंत्री ध्यानेंद्र सिंह व पूर्व विधायक रमेश अग्रवाल सहित भाजपा नेताओं ने श्रद्धासुमन अर्पित किए। राजमाता की समाधि पर श्रद्धासुमन अर्पित करने के लिए लोग श्रद्धासुमन अर्पित करने पहुंचे। जबकि राजमाता की जयंती हिंदू कैलेंडर की तिथि व तारीख के अनुसार दो बार मनाई जाती है। तारीख के अनुसार केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया व तिथि के अनुसार उनकी पुत्री कैबिनेट मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया मनाती हैं। राजमाता की समाधि अर्पित करने के लिए सुरेंद्र सिंह परमार चच्चू, केसी सिंह राजपूत के अलावा अन्य कार्यकर्ता भी मौजूद थे।
श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट ने कहा कि राजमाता ध्येयनिष्ट तपस्वी थीं। उन्होंने बगैर किसी स्वार्थ के संगठन को मजबूत करने की दिशा में अपनी अंतिम सांस तक कार्य किया। मुख्यमंत्री व राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद को भी शालीनता के साथ स्वीकार नही किया। क्योंकि उनका ध्येय जन-जन की सेवा का था। राजमाता जैसे व्यक्तित्वों के कारण भाजपा आज विश्व की सबसे बड़ी पार्टी है।
राष्ट्रवाद को समर्पित था राजमाता का जीवन
प्रखर राष्ट्रवादी व धर्मनिष्ट राजमाता विजयाराजे सिंधिया का जन्म- तिथि के अनुसार 1919 में सागर जिले के राणा परिवार में हुआ था। राजमाता के पिता महेंद्र सिंह ठाकुर जालौन जिले के डिप्टी कलेक्टर थे। विवाह के पू्र्व का नाम लेखा दिव्येश्वरी था। विजयाराजे सिंधिया का विवाह 2 फरवरी 1941 में ग्वालियर स्टेट के महाराज जीवाजी राव सिंधिया के साथ हुआ था। राजमाता विजयाराजे सिंधिया की पांच संताने थीं, पहली बेटी पद्मवती, द्वितीय ऊषा राजे सिंधिया, तीसरी माधवराव सिंधिया, चौथी वसुंधरा राजे सिंधिया व सबसे छोटी बेटी यशोधराराजे सिंधिया थीं। राजपथ से निकलकर लोकपथ के लिए अपनी एक-एक सांस समर्पित करने पर उन्हें आपातकाल के दौरान 19 माह तक जेल में रखा गया था।
दस मिनट किया प्रभारी मंत्री ने इंतजार
राजमाता विजयाराजे सिंधिया की छत्री पर पुष्पाजंलि अर्पित करने के लिए प्रभारी मंत्री तुलसी सिलावट अपने तय कार्यक्रम के अनुसार पहुंचे और फिर उसके बाद सांसद विवेक नारायण शेजवलकर तथा उसके बाद अन्य पदाधिकारी पहुंचे, अन्य पदाधिकारियों के इंतजार में प्रभारी मंत्री ने दस मिनट इंतजार किया और उनके आने पर अम्मा महाराज को पुष्पाजंलि अर्पित की।
इधर शहर भर में भी राजमाता विजयाराजे सिंधिया की 21वीं पुण्यतिथि पर कई कार्यक्रम आयोजित हुए। कई समाजसेवी संगठनों ने वृद्धाआश्रम और कुष्ठ आश्रम में जाकर वहां मौजूद बुजुर्ग और बच्चों को फल वितरण किया।