इमरती बोलीं- पार्टी बदली इसलिए हारी मैं..

Jan 09 2022

ग्वालियर। एक बार फिर सिंधिया समर्थक इमरती देवी बोलने के अंदाज के कारण चर्चा में हैं। इस बार महिलाओं के कार्यक्रम में जोश-जोश में वह कह गईं, देखो हम साल 2008 से अभी तक विधायक रहे, लेकिन जा बार जरा हार गए। वो का है कि हमने पार्टी बदल ली थी, नहीं तो हमें कोई नहीं हरा पाता। सिंधिया समर्थक के हार को लेकर यह बोल नए नहीं हैं। इससे पहले भी वह कई बार पार्टी बदल लेने को ही हार का कारण बताती रही हैं। इस बार वह महिलाओं को जोश-जोश में पीड़ा बयां कर बैठीं। बात चाहे किसी भी अंदाज में कही गई हो, लेकिन इमरती देवी का यह वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चित हो रहा है। अब इमरती कुछ इस मामले में कुछ कहने से बचती नजर आ रही हैं।
ग्वालियर में महिलाओं पर आधारित एक कार्यक्रम डीडी नगर में हुआ था। इसमें केन्द्रीयमंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की कट्टर समर्थक व लघु उद्योग निगम की अध्यक्ष इमरती देवी बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुई थीं। इमरती देवी ने कार्यक्रम में महिलाओं के लिए बोलना शुरू किया।
महिलाओं का जोश बढ़ाने के लिए उन्होंने खुद का उदाहरण देते हुए कहा कि हमें ही देख लो साल 2008 से अभी तक विधायक रहे हैं। फिर यह भी कहा कि जा बार जरा हार गए। इस पर इमरती देवी पहले हंसी फिर कहा क्योंकि पार्टी बदल लई न इसलिए नहीं तो कौउ नहीं हरा पाता। उनका यह बयान वहां बैठे कई लोगों के मोबाइल में रिकॉर्ड हो गया था। रविवार सुबह से सिंधिया समर्थक इमरती का यह बयान सोशल मीडिया पर चर्चित बना हुआ है।
पहले भी झलक चुका है हार का दर्द
यह पहला मौका नहीं है, जब सिंधिया समर्थक भाजपा नेता इमरती देवी का हार को लेकर दर्द झलका हो। इससे पहले भी कई मौकों पर वह अपनी हार के लिए पार्टी बदलने को दोष देती नजर आती हैं। हारने के तत्काल बाद भी उन्होंने ऐसा ही कहा था। इससे पहले वह कांग्रेस के टिकट पर विधायक थी। सिंधिया के समर्थन में इस्तीफा देकर भाजपा में सदस्यता ली। उपचुनाव में भाजपा की ओर से डबरा से विधायक का चुनाव लड़ा, लेकिन उनके ही समधि ने उन्हें हरा दिया। जिसके बाद वह लगातार कई मौकों पर अपनी हार के लिए पार्टी बदलने की बात कह चुकी हैं।
सिंधिया के लिए सबसे पहले बगावत की थी
लघु उद्योग निगम की अध्यक्ष व भाजपा नेत्री इमरती देवी को ऐसे ही सिंधिया समर्थक नहीं माना जाता है। साल 2018 में विधानसभा चुनाव में वह कांग्रेस से विधायक बनी थी। पर लोकसभा चुनाव में सिंधिया के हारने के बाद प्रदेश में उनको तवज्जो नहीं दी गई, तो वहीं थी जो सिंधिया के लिए सबसे पहले बगावत पर उतरी थीं। हालांकि पार्टी बदलने के बाद उपचुनाव में वह डबरा से चुनाव हार गईं, लेकिन उसके बाद हाल ही में उनहें लघु उद्योग निगम का अध्यक्ष बनाया गया है।